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गुवाहाटी, 09 जनवरी (हि.स.)। असम में कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियां मियां (बांग्लादेशी) समुदाय को बढ़ावा देने और राज्य में मियां पहचान को आगे बढ़ाने की बेताब कोशिश में एक साथ आ गई हैं। यह सब बदरुद्दीन अजमल काे असम का मुख्यमंत्री बनने की अपनी योग्यता के बारे में खुले दावों, अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) के वोटों से राज्यसभा सांसद बने अजीत भुइयां के असम जातिया परिषद (एजेपी) में शामिल होने और सरूपथार विधानसभा क्षेत्र से 11 हजार मियां वोटरों के नाम हटाने को लेकर हुए विवाद के बैकग्राउंड में हो रहा है।
असम प्रदेश भाजपा मुख्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी भवन से शुक्रवार काे जारी एक बयान में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता जयंत कुमार गोस्वामी ने कहा कि गोलाघाट जिले के सरूपथार विधानसभा क्षेत्र के उरियामघाट में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद 11 हजार से ज़्यादा मुसलमानों को बेदखल किया गया। वोटरों की लिस्ट के चल रहे स्पेशल समरी रिवीजन के दौरान, सरूपथार क्षेत्र से लगभग 11 हजार लोगों के नाम हटा दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन मियां वोटरों के नाम हटाने से रोकने के लिए, अखिल गोगोई ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया के खिलाफ बदनामी का अभियान शुरू किया है। इस साजिश को और हवा देने और मियां तुष्टीकरण में शामिल होने के लिए, विपक्षी पार्टियों ने भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ दिसपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है, जिससे उनकी स्वदेशी विरोधी मानसिकता सामने आ गई है।
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में मियां म्यूजियम के प्रस्ताव को बढ़ावा देकर और निलंबित कांग्रेस विधायक शेरमान अली की मदद से, अखिल गोगोई असम में मियां राष्ट्रवाद की एक नई धारा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि निचले असम के मियां-बहुल इलाकों में, जो पहले मुख्य रूप से हिंदू आबादी वाले क्षेत्र थे, शेरमान अली के समर्थन से मियां प्रवासियों को भारतीय नागरिक के रूप में वैध बनाने और मियां गौरव को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
यह कहते हुए कि आने वाली जनगणना में, मियां मुसलमान राज्य की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत हो सकते हैं, भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष के इस रुख की कड़ी आलोचना की है।----------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय