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कानपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। कृषि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य किसानों तक नवीन तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक पद्धतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। वैज्ञानिकों से अनुरोध है कि अपने शोध को खेत तक पहुंचाने के लिए और अधिक प्रयास करें। यह बातें गुरुवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कही।
भाकृअनुप–अटारी जोन-तृतीय में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उच्चस्तरीय अधिकारियों के साथ संस्थान का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की कार्यप्रणाली, शोध गतिविधियों एवं संचालित परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उनके साथ उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रविंद्र कुमार, मंडलायुक्त एवं चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के. विजयेंद्र पांडियन, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह तथा अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।
भ्रमण के दौरान कृषि मंत्री ने भाकृअनुप–अटारी परिसर में विकसित प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन खंड का अवलोकन किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती की उपयोगिता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की लागत कम करने में इसकी भूमिका को रेखांकित करते हुए इस पहल की सराहना की। इस अवसर पर मंत्री ने निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह से प्राकृतिक खेती से प्राप्त परिणामों, किसानों में इसके प्रभाव तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कृषि मंत्री ने संस्थान में संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं विस्तार परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से संवाद किया।
अंत में कृषि मंत्री एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संस्थान द्वारा कृषि विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भाकृअनुप–अटारी, कानपुर भविष्य में भी राज्य एवं क्षेत्रीय कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा और किसानों के हित में प्रभावी कार्य करता रहेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप