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सिंघार बाेले: दूषित जलकांड में ननि कमिश्नर पर गैर इरादतन हत्या का केस हो, महापाैर इस्तीफा दें
भोपाल, 08 जनवरी (हि.स.)। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर जल-प्रदूषण कांड के बाद किए गए वाटर ऑडिट के निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के “स्वच्छता” और “विकसित भारत” के दावे ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन्हाेंने देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि इंदौर को लगातार आठ बार स्वच्छता अवॉर्ड फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिलवाए गए।
इंदौर के दूषित जलकांड को लेकर गुरुवार काे भोपाल स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा कि यह हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने और मेयर के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्हाेंने कहा कि भगीरथपुरा से लेकर इंदौर के कई गरीब व मेहनतकश इलाक़ों तक नलों से आ रहा दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी इस बात का प्रमाण है कि यह केवल एक इलाक़े की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहरी प्रशासन की प्रणालीगत विफलता है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जिस शहर में नलों से जहर जैसा पानी आ रहा है, वहां इंदौर को आठ बार स्वच्छता अवॉर्ड कैसे मिले। उन्होंने कहा कि यह बात सरकारी अधिकारी भी जानते हैं कि किस तरह दस्तावेज तैयार किए गए। अगर सब कुछ सही था तो फिर गंदा पानी पीने से मौतें क्यों हुईं? उमंग सिंगार ने कहा कि मैंने भगीरथपुरा का दौरा किया। हमें पीड़ित इलाक़े में जाने से रोकने की कोशिश की गई, पुलिस बैरिकेटिंग लगाकर नाकाबंदी करती रही। उन्हाेंने आराेप लगाया कि पीड़ित परिवार दबाव में दिखे कई लोग खुलकर बोलने से डर रहे थे। मुआवज़े, इलाज और भविष्य की सुरक्षा को लेकर पीड़ितों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बावजूद सरकार कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई साल से पाइपलाइन का काम कमीशन के खेल में अटका रहा। उन्होंने सवा सौ करोड़ रुपए के फर्जी टेंडर और बिलों का आरोप दोहराते हुए कहा कि एक दिन में 5–5 किलोमीटर सीवेज लाइन डालने के दावे किए गए, जो असंभव हैं। इसके बावजूद भुगतान हुआ। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के बीच जाने के बजाय रात दो बजे संघ कार्यालय में बैठकें करते रहे। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की पूरे प्रदेश में वाटर ऑडिट होना चाहिए और लोगों से भी अपील की की नागरिक, जनप्रतिनिधियों भी अपने अपने क्षेत्र में वाटर ऑडिट करें ताकि सच्चाई सामने आ सके। सिंघार ने महापाैर, नगरीय प्रशासन मंत्री और इंदौर के प्रभारी मंत्री मुख्यमंत्री पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुर्सी पर बैठने के साथ जिम्मेदारी आती है। अगर संवेदनाएं मर चुकी हैं, तो जनता के सामने जवाब कैसे देंगे? क्या इतनी मौतों के बाद भी कोई आत्ममंथन नहीं करेगा?
उन्होंने कहा कि वाटर ऑडिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंदौर का जल संकट कोई अपवाद नहीं, बल्कि भाजपा के शहरी शासन मॉडल की असफलता है। जब तक साफ़ पानी, जवाबदेही, पारदर्शिता और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्ष जनता की इस लड़ाई को सड़क से सदन तक पूरी ताकत से उठाता रहेगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निगम के अधिकारी और महापौर सहित सभी जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की जाए ताकि ऐसी घटना दोबारा ना हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे