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जौनपुर,08 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने सियासी दलों की नींद उड़ा दी है। कुल 5 लाख 89 हजार से अधिक मतदाताओं की संख्या कम हाेने से हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन 40 से 50 हजार वोट कम हो गए हैं। इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय माना जा रहा है। भले ही यह कहना अभी जल्दबाजी हो कि किसे फायदा होगा और किसे नुकसान, लेकिन सियासी हलचल तेज हो चुकी है।
बात करें 2022 के विधानसभा चुनाव में जौनपुर की ताे 09 विधानसभा सीटों में से 05 सीटों पर समाजवादी पार्टी और 04 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी।वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर की दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत ने सियासी समीकरण बदलने के संकेत दे दिए थे। ऐसे में एसआईआर के बाद मतदाता सूची में आई भारी कटौती को सभी दल बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।
एसआईआर के बाद हर सीट पर कटे वोट जाे 2022 में जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा हैं—जौनपुर सदरभाजपा के गिरीश चंद्र यादव ने सपा के अरशद खान को 8052 वोटों से हराया था। यहां पर 1,04,501 मतदाता कम हुए।मल्हनी- सपा के लकी यादव ने धनंजय सिंह को 17,527 वोटों से हराया। यहां 59,341 वोट कम हुए।मुंगराबादशाहपुर- सपा के पंकज पटेल ने भाजपा के अजय दुबे को 5230 वोटों से हराया। यहां 61,117 वोट कम हुए।मछलीशहर- सपा की डॉ. रागिनी सोनकर ने भाजपा के मेहीलाल गौतम को 8484 वोटों से हराया। यहां 64,942 वोट कम हुए।
मडियाहू- अपना दल (एस) के डॉ. आर.के. पटेल ने सपा की सुषमा पटेल को 1206 वोटों से हराया। यहां पर 52,686 वोट कम हुए।
जाफराबाद- सुभासपा के जगदीश नारायण राय ने भाजपा के हरेंद्र प्रसाद सिंह को 6292 वोटों से हराया। यहां 71,463 मतदाता कम हुए।
केराकत- सपा के तूफानी सरोज ने भाजपा के दिनेश चौधरी को 9844 वोटों से हराया। यहां पर 63,825 वोट कम हुए।बदलापुर- भाजपा के रमेश चंद्र मिश्रा ने सपा के ओम प्रकाश दुबे को 1326 वोटों से हराया। यहां पर 50,654 मतदाता कम हुए।शाहगंज- निषाद राज पार्टी के रमेश सिंह ने सपा के शैलेन्द्र यादव को 719 वोटों से हराया। यहां पर 61,014 वोट कम हुए।आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि कई सीटों पर कम हुए वोट, जीत के अंतर से कई गुना अधिक हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है किये वोट किस सामाजिक वर्ग से जुड़े थे? किस पार्टी का परंपरागत वोट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ? इन सवालों के जवाब ही 2027 की सियासी तस्वीर तय करेंगे।फिलहाल इतना तय है कि एसआईआर के बाद बदले मतदाता आंकड़ों ने जौनपुर की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। 2027 का विधानसभा चुनाव किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। सियासी दलों ने अभी से अपना गणित और संगठन मजबूत करने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है, क्योंकि अब मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव