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रांची, 08 जनवरी (हि.स.)। श्रीलक्ष्मी वेकटेश्वर मंदिर में पवित्रतम् धनुर्मास व्रतोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।
धनुर्मास व्रतोत्सव को लेकर प्रत्येक दिन तिरूप्पावै प्रबंधम् का अनुसंधान के तहत भगवान् श्रीलक्ष्मी वेकटेश्वरको हर दिन नए कपडे और आयुर्वेदिक औषधि का पान कराया जा रहा है।
यह व्रतोत्सव 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 पूरे एक माह तक आयोजित किया जा रहा है। व्रतोत्सव के दौराान भगवान वेंकटेश्वर भगवान् रंगनाथ के रूप में और भूमि देवी लक्ष्मी को गोदाम्बा देवी के रूप में पूजा की जा रही है। धनुर्मास महोत्सव की महिमा सभी जानते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस व्रत को द्वापर में श्री राधा जी ने गोपिकाओं के साथ मिल कर कात्यायनी व्रत के रूप में भगवान् को पाने के लिये की थी। इसी प्रकार कलियुग में लगभग एक हजार वर्ष पहले श्रीभूमिदेवी लक्ष्मी की अवतार श्रीआण्डाल जिन्हें गोदाम्बा देवी के नाम से जाना जाता है वे भगवान् वटपत्रशायी को पति रूप में प्राप्त करने को इस व्रत का अनुसंधान किया। गोदा देवी की ओर से किया गया यह अनुष्ठान भोग और मोक्ष दोनों को प्रदान करनेवाला है। श्रीगोदा जी तीस दिन के इस व्रत में, प्रत्येक दिन भगवान् की अनुशंसा में तीस तिरूप्पावै नामक पाशूरों (30 भजनों का एक प्रसिद्ध तमिल भक्ति काव्य संग्रह) की रचना कर डाली। गोदाम्बा जी ने इन पाशूरों में संपूर्ण वेदांत को शामिल कर गागर में सागर भरनेवाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak