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नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा केंद्र सरकार सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के लिए एक कैशलेस इलाज योजना जल्द शुरू करेगी। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले भले इंसान को 25 हजार रुपये का इनाम भी मिलेगा और पीड़ित को अस्पताल में सात दिन तक रहने पर 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। इलाज का खर्च इंश्योरेंस कंपनियां वहन करेंगी और जहां इंश्योरेंस नहीं होगा वहां सरकार रोड सेफ्टी फंड से खर्च उठाएगी।
गडकरी ने यहां गुरूवार को देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की सालाना बैठक की। बैठक में सड़क सुरक्षा, यात्रियों और आम लोगों की सुविधा, व्यापार करने में आसानी और ऑटोमोबाइल नियमों, कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम, हिट एंड रन पीड़ितों को मुआवजा, ई-डीएआर, सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, सड़क सुरक्षा अभियान, स्क्रैपिंग पॉलिसी, बस बॉडी कोड, दिव्यांगजनों के लिए सुगमता, बीएनसीएपी 2.0, ट्रकों और बसों में एडीएएस और मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन जैसे 12 विषयों पर चर्चा की गई।
गडकरी ने कैशलेस इलाज योजना पर राज्यों की तैयारियों की समीक्षा कर उन्हें सक्रिय रूप से कमियों को दूर करने के लिए आगाह गया। उन्होंने बताया कि असम, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत परिवहन एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच करीबी और लगातार तालमेल जरूरी है। नीतियों में सामंजस्य, सहकारी संघवाद को मजबूत करने और देशभर में सुरक्षित, कुशल और नागरिक-केंद्रित परिवहन समाधान देने के लिए नियमित सलाह-मशविरा आवश्यक है। नई ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी का भी उल्लेख किया जो 15 जनवरी 2025 को शुरू की गई थी। पहले सात साल में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने में कठिनाइयां आईं और मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर दो साल तक रोक भी लगाई थी लेकिन नई योजना के बाद एक ही साल में 44 केंद्र स्थापित किए गए और 87 पाइपलाइन में हैं।
इसके अलावा मीटिंग में देश के 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1.85 लाख हिट एंड रन मामलों पर चर्चा की गई। इसमें अब तक 12,273 दावे निपटाए गए हैं। गडकरी ने राज्यों से अपील की कि वे इस नीति के बारे में जागरूकता बढ़ाएं और दावों की प्रक्रिया को तेज करें। मुआवजे की राशि बढ़ाकर गंभीर चोट के मामलों में 50 हजार रुपये और मृत्यु के मामलों में दो लाख रुपये कर दी गई है।
गडकरी ने कहा कि जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम के तहत 100 जिलों की सूची जारी की गई है जहां दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक है। इन जिलों में वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर दुर्घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा। नागपुर, उन्नाव और कामरूप में इस कार्यक्रम से पहले ही बड़ी सफलता मिली है।
बैठक में दिव्यांगजनों के लिए सुगमता पर निर्णय लेते हुए सभी सिटी बसें दिव्यांगजन-फ्रेंडली बनाने पर चर्चा की गयी। इनमें लो फ्लोर हाइट, हाइड्रोलिक नीलिंग, व्हीलचेयर, लिफ्ट, रैंप और सहायक हैंडल जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। बस बॉडी कोड पर भी चर्चा हुई। पिछले तीन महीनों में छह बस दुर्घटनाओं में 145 लोगों की मौत हुई। खराब डिजाइन और घटिया सामग्री को जिम्मेदार माना गया। संशोधित बस बॉडी कोड एक सितंबर 2025 से लागू हुआ है, लेकिन इसके बाद भी कुछ समस्याएं सामने आईं। अब निर्णय लिया गया है कि स्लीपर कोच बसें केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां ही बनाएंगी और मौजूदा बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्रोसिनेस इंडिकेटर जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी।
बैठक में मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर भी चर्चा कर सड़क सुरक्षा सुधार, व्यापार में आसानी, नागरिक सेवाएं, बेहतर नियम, गतिशीलता, उत्सर्जन नियम और परिभाषाओं को सरल बनाने जैसे विषय शामिल हैं।
गडकरी ने कहा कि स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत दिसंबर 2025 तक 3.94 लाख वाहनों को स्क्रैप किया गया है। इसमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी वाहन शामिल हैं। निजी क्षेत्र ने 2700 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे 40 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व और 70 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए हैं।
मंत्री गडकरी ने कहा कि वाहन-से-वाहन संचार तकनीक को भी लाने पर विचार किया जा रहा है। इससे गाड़ियां वायरलेस तरीके से एक-दूसरे से जुड़कर गति, स्थान, ब्रेकिंग जैसी जानकारी साझा करेंगी। इससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की पहचान हो सकेगी। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपयोग की अनुमति सिद्धांत रूप में दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर