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दीव, 07 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की गोलकीपर प्रवीन कुमारी ने अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा डटकर खड़े रहने में बिताया है—पहले अपने गांव की सामाजिक बंदिशों के खिलाफ और अब फुटबॉल मैदान पर गोलपोस्ट के बीच। 26 वर्षीय प्रवीन ने सीमित संसाधनों, सामाजिक विरोध और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद अपने फुटबॉल के सपने को जिंदा रखा और आज वह हिमाचल प्रदेश में उभरती महिला फुटबॉल की एक अहम पहचान बन चुकी हैं।
खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 (केआईबीजी 2026) में दीव के घोघला बीच पर खेले जा रहे महिला बीच सॉकर मुकाबले में प्रवीन का जज्बा एक बार फिर देखने को मिला। मेजबान दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के खिलाफ हिमाचल प्रदेश की टीम ने अपने पहले ही महिला बीच सॉकर मैच में शानदार वापसी करते हुए 7-5 से जीत दर्ज की। इस मुकाबले में पैर में गंभीर चोट लगने के बावजूद प्रवीन ने हार नहीं मानी और कई अहम बचाव करते हुए टीम को जीत की राह पर बनाए रखा।
मैच के तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में मेजबान टीम के आक्रमण को प्रवीन ने लगातार नाकाम किया, जिससे विपक्षी टीम बढ़त नहीं बना सकी। चोट के कारण कुछ समय के लिए मैदान से बाहर जाने के बाद जब वह दोबारा लौटीं, तो बीच सॉकर में मिलने वाले रोलिंग सब्स्टीट्यूशन के नियम का फायदा उठाते हुए उन्होंने न सिर्फ गोल रोकने का काम जारी रखा, बल्कि अपनी साथी खिलाड़ियों का हौसला भी बढ़ाया। इसके बाद हिमाचल की टीम ने आखिरी पलों में गोल दागकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के खटगांव गांव में जन्मीं प्रवीन कुमारी एक दिहाड़ी मजदूर पिता की सबसे छोटी संतान हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी प्रवीन आज अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। वह ऊना के एक निजी स्कूल में शारीरिक शिक्षा शिक्षिका के तौर पर काम करती हैं, जिससे परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके और वह अपने खेल करियर को भी जारी रख सकें।
प्रवीन का खेल में आना आसान नहीं था। जिस समय उन्होंने फुटबॉल खेलना शुरू किया, उस दौर में उनके गांव में लड़कियों को खेल से दूर रखा जाता था। ऐसे माहौल में प्रवीन ने लड़कों के साथ अभ्यास करना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने कुछ और लड़कियों को जोड़ा और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण या संसाधन के एक छोटी-सी टीम खड़ी की।
प्रवीन कहती हैं, “लड़की होकर खेलना आसान नहीं होता। दस साल पहले जब मैंने शुरुआत की, तब हमारे गांव में सिर्फ लड़कों को ही खेल की इजाजत थी। हमने बिना ट्रेनिंग के, अनियमित तरीके से खेलना शुरू किया, लेकिन हमारा मकसद अगली पीढ़ी की लड़कियों के लिए रास्ता बनाना था। आज हमारे पास पूरी टीम है और हम स्थानीय टूर्नामेंट खेल रहे हैं।”
खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में हिमाचल प्रदेश की टीम के लिए यह पहला बड़ा बीच सॉकर अनुभव है। टीम ने टूर्नामेंट से पहले सिर्फ 10 दिन रेत के मैदान पर अभ्यास किया था। बावजूद इसके, टीम ने शुरुआती दो क्वार्टर में 4-4 की बराबरी बनाए रखी। चोट के बावजूद प्रवीन की वापसी और नेतृत्व ने टीम को जीत दिलाई।
प्रवीन ने कहा, “चोट गलत समय पर लगी, लेकिन लड़कियों ने सही समय पर वापसी की। यह सिर्फ शुरुआत है, अब हमें इसी लय को बनाए रखना है।”
प्रवीन कुमारी की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है, जो देश के दूरदराज इलाकों में खेल के सपने देखने वाली हजारों लड़कियों को प्रेरणा देती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे