सर्दियों की रौनक और सर्कस की वापसी, चुचुड़ा में फिर सजा है मनोरंजन का मेला
हुगली, 07 जनवरी (हि. स.)। एक समय सर्दी का मतलब ही होता था सर्कस। ऐसे में अगर सर्दियों का मनोरंजन सर्कस हो, तो बात ही कुछ और होती है। हुगली जिले के चुचुड़ा स्थित बाघा जतिन मैदान में लंबे समय बाद फिर से सर्कस का तंबू तना है, जिसने लोगों में खासा उत्स
सर्दियों की रौनक और सर्कस की वापसी, चुचुड़ा में फिर सजा है मनोरंजन का मेला


हुगली, 07 जनवरी (हि. स.)। एक समय सर्दी का मतलब ही होता था सर्कस। ऐसे में अगर सर्दियों का मनोरंजन सर्कस हो, तो बात ही कुछ और होती है। हुगली जिले के चुचुड़ा स्थित बाघा जतिन मैदान में लंबे समय बाद फिर से सर्कस का तंबू तना है, जिसने लोगों में खासा उत्साह भर दिया है। कभी सर्कस में बाघ, शेर, हाथी, गैंडा और चिंपैंजी जैसे जानवर देखने को मिलते थे, लेकिन अब वह दौर बीत चुका है।

वर्तमान में सर्कस में मुख्य रूप से जिम्नास्टिक के रोमांचक करतब दिखाए जा रहे हैं। इसके अलावा योगाभ्यास पर आधारित कुछ अनोखे करतब भी दर्शकों को हैरान कर रहे हैं, जिनमें जिंदा सिंगि मछली निगलने जैसे प्रदर्शन शामिल हैं। सर्कस कलाकार मोहम्मद रशीद अपने अद्भुत करतबों से दर्शकों को चकित कर रहे हैं।

वह एक बाल्टी पानी आसानी से पी जाते हैं और तीन जिंदा सिंगि मछलियां निगलकर फिर उन्हें पेट से बाहर निकाल कर दिखाते हैं। इतना ही नहीं, वह रंगीन पानी पीकर अलग-अलग रंगों को अलग-अलग तरीके से बाहर निकालने का करतब भी प्रस्तुत करते हैं।

रशीद का कहना है कि यह पूरा प्रदर्शन योग अभ्यास पर आधारित है। उनकी मां लायला बीबी और पिता रफीक आलम कुरैशी भी सर्कस में यही करतब दिखाते थे। रशीद ने यह कला अपने माता-पिता से ही सीखी और आज उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय