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-वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 9 प्रस्तावों को राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति
देहरादून, 06 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए इसे नियंत्रित करने के लिए और अधिक प्रभावी व समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक काे अधिकारियाें काे मानव–वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए। मुख्यमंत्री ने भालू, गुलदार, बाघ और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, वन विभाग व जिला प्रशासन की संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी-बी फेंसिंग, वॉच टावर सहित अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए शिविरों का आयोजन और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) को लगातार सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य के हाथी और बाघ कॉरिडोर समेत सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने वन्यजीव आवागमन मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास निर्माण को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों में संशोधन के प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वन्यजीव समन्वय समितियों को सक्रिय रखने, संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों और ग्रामों की हॉट-स्पॉट मैपिंग शीघ्र पूर्ण करने तथा स्कूलों, आंगनबाड़ियों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया, ताकि वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित न हों।
बैठक में ईको-टूरिज्म को सुदृढ़ करने, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्रों में कार्य विस्तार तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में पशु चिकित्सकों की तैनाती के निर्देश भी दिए गए। बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 9 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में उपखनिज चुगान से संबंधित 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ भेजने का निर्णय लिया गया।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिससे राज्य की वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने जानकारी दी कि पूर्व बैठकों के निर्णयों के तहत कई प्रमुख परियोजनाओं को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में माैत के मामलों में अनुग्रह राशि छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा 32 वन प्रभागों में 93 क्विक रिस्पॉन्स टीमों का गठन किया गया है तथा पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार