माघ मेला हमारी शाश्वत संस्कृति का जीवंत स्वरूप : प्रो.मार्तण्ड सिंह
प्रयागराज, 06 जनवरी (हि.स.)। संगम तट पर माघ मेला की पवित्र भूमि में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक चेतना, जिज्ञासा और भक्तिभाव जागृत हो उठता है। यह हमारी चिरंतन एवं शाश्वत संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। उक्त विचार मंगलवार को उत्त
अतिथिगण


प्रयागराज, 06 जनवरी (हि.स.)। संगम तट पर माघ मेला की पवित्र भूमि में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक चेतना, जिज्ञासा और भक्तिभाव जागृत हो उठता है। यह हमारी चिरंतन एवं शाश्वत संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। उक्त विचार मंगलवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘‘शब्द-ब्रह्म’’ संगोष्ठी में प्रो मार्तण्ड सिंह ने माघ ‘‘मेला महात्म्य : एक समेकित शाश्वत चिंतन’’ विषय पर व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने रामचरितमानस में माघ मेले के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा है “माघ मकरगति रवि जब होई, तीरथपतिहिं आव सब कोई।” माघ मेला क्षेत्र पुराणों, निगमों और आगमों से प्रवाहित हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और संस्कारों की धरोहर है। संगम तट पर प्रकृति स्वयं गेरुए स्वरूप में उपस्थित प्रतीत होती है, जो जनसैलाब के आकर्षण का प्रमुख कारण है - तीर्थराजो जयति प्रयागः।

सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने कहा कि माघ मेला ज्ञान, आस्था, अनुष्ठान और विज्ञान का अद्भुत संगम है। यहां ज्ञान-पिपासु सत्य की खोज में आते हैं, जबकि सामान्य जन कल्पवास और पुण्य स्नान के माध्यम से आत्मशुद्धि की कामना करता है। उन्होंने गंगाजल की वैज्ञानिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंतर्गत ब्रह्मनाद कला महोत्सव प्रतियोगिता के तहत काव्य पाठ का आयोजन किया गया। जिसमें, वासुदेव पाण्डेय ने पढ़ा “संगम के तट पर जब ‘राम-नाम’ गूंजता है, पत्थर-सा हृदय भी पिघलकर मोम सा हो जाता है।”

आरती सिंह ने प्रयागराज की महिमा को शब्दों में पिरोते हुए पढ़ा, ‘प्रयागराज की धरा का कण-कण कहता है इक बार प्रयागराज तो आइए। प्यार का वो फरिश्ता अब वो नहीं रहा, राधा कृष्णा का किस्सा अब नहीं रहा।’ इसके अलावा प्रियंका यादव एवं रविराधेय की काव्य प्रस्तुतियों को भी श्रोताओं से भरपूर सराहना मिली।

इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं वक्ताओं द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने वक्ताओं को अंगवस्त्र व पौधा देकर स्वागत किया। काव्य पाठ में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने प्रणामपत्र देकर सम्मानित किया। संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र