(अपडेट) शीतकालीन सत्र में दिल्ली के उपराज्यपाल ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, आगामी नीतियों की रूपरेखा की प्रस्तुत
- दिल्ली को कचरा मुक्त और चार वर्षों में लगभग 35 लाख वृक्ष तथा 63 लाख झाड़ियां लगाने का लक्ष्य नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण के साथ सोमवार को दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है। विधानसभ
दिल्ली विधानसभा में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का अभिभाषण


- दिल्ली को कचरा मुक्त और चार वर्षों में लगभग 35 लाख वृक्ष तथा 63 लाख झाड़ियां लगाने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण के साथ सोमवार को दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अभिभाषण के लिए आमंत्रित किया। उपराज्यपाल ने अपने अभिभाषण में दिल्ली सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आगामी नीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली की आठवीं विधानसभा के चौथे सत्र से पहले सरकार के सामने शासन और प्रशासन में वर्षों से व्याप्त जड़ता और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करना सबसे बड़ी चुनौती रही है।

उपराज्यपाल ने दिल्ली की 8वीं विधानसभा के चौथे सत्र में सभी सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार की कुछ उपलब्धियों और कुछ नई नीतियों का, संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करने जा रहा हूं, जो दिल्ली के नागरिकों को, उनके लक्ष्यों और आकांक्षाओं की पूर्ति करने की दिशा में, कार्यान्वित की जा रही हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि लगभग दस महीने के अल्प-काल में दिल्ली सरकार ने सभी दिशाओं में अनेक महत्वपूर्ण और ठोस कदम उठाए हैं। महात्मा गांधी के सर्वोदय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय, तथा बाबा साहेब के समता के सिद्धांतों के अनुरूप, पिछले दस महीनों में सरकार ने दिल्ली के सभी नागरिकों के कल्याण के दिशा में अनेक अप्रत्याशित निर्णय लिए जिनका क्रियान्वयन जारी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये का एक ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया, जो सभी दस प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है। यह प्राथमिक क्षेत्र आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला कल्याण, जलापूर्ति, बिजली, सड़कें, औद्योगिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता तथा सामाजिक न्याय हैं। सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत, व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधार किए हैं। इनमें लाइसेंसिंग तथा श्रम संबंधी सुधार, आदि प्रमुख हैं। उत्तम सेवा एवं पारदर्शिता लाने के लिए ई-गवर्नेंस द्वारा विभिन्न विभागों से जुड़ी 75 ई-डिस्ट्रिक्ट सर्विसेज़ को, सिटीज़न सर्विस सेंटर्स के साथ सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। सरकार के कार्य ग्रहण के पांच महीने के भीतर प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में ई-आफिस का क्रियान्वयन किया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पहल के तहत शराब की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को, 24×7 खोलने की अनुमति प्रदान की गई है। साथ ही 21 वर्षों में पंजीकरण के अनिवार्य नवीनीकरण की व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है। इसी के साथ दिल्ली दुकानें एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में अन्य संशोधनों के लिए भी एक विधेयक लाया जा रहा है। अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, भू-उपयोग परिवर्तन, फैक्टरी और व्यापार लाइसेंस आदि को प्राप्त करना आसान कर दिया गया है। 29 मौजूदा श्रम कानूनों को, समाहित कर, उन्हें चार व्यापक लेबर कोड्स में एकीकृत करते हुए सरकार ने केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार ने ‘जिला परियोजना निधि योजना’ की शुरुआत की है। 1400 करोड़ रूपए की राशि के साथ मुख्यमंत्री विकास निधि को पूंजीगत एवं आधारभूत संरचना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए अपने कुल व्यय का 13 प्रतिशत आवंटित किया है। स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 17 अस्पतालों में विभिन्न निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सितंबर 2025 में 5 अस्पताल ब्लॉकों का उद्घाटन किया गया। नई सरकार के गठन के बाद दिल्ली में ‘आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ को लागू किया। अब तक 6 लाख 72 हजार 551 आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी शुल्क वृद्धि की समस्या से निपटने के लिए, “दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025”, पारित किया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025–26 के बजट में पूंजीगत व्यय को दोगुना करते हुए लगभग 28,000 करोड़ रुपये किया है। इलेक्ट्रिक वाहन पहल के अंतर्गत भारत सरकार के सहयोग से लगभग 3535 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जिनमें से लगभग 1150 देवी बसें चलाई जा रही हैं। सरकार बसों और मेट्रो के बीच सहज यात्रा सुनिश्चित करने के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड लागू करने की योजना पर कार्य कर रही है। दिल्ली की महिलाओं को यह सुविधा निःशुल् पिंक कार्ड के रूप में प्रदान की जाएगी।

इसके साथ ही इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इन कॉलोनियों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर और अटल कैंटीन की सुविधा भी दी जा रही है। सरकार ने 'अटल कैंटीन योजना' प्रारंभ की है, जिसके अंतर्गत 45 अटल कैंटीनों का शुभारंभ किया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार ने आते ही यमुना की स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यमुना कायाकल्प के लिए कई स्तर पर एक साथ कार्य किए जा रहे हैं। नए एसटीपी लगाए जा रहे है। दिल्ली जल बोर्ड को जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, 9,000 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली में वर्षो से लंबित पीएम स्वामित्व योजना को लागू करने के लिए दिल्ली आबादी देह सर्वेक्षण एवं अभिलेख संचालन नियम 2025 अधिसूचित किया गया है। प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने और नागरिक सेवाओं तक जनता की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुशासन दिवस 25 दिसंबर 2025 से अपने 11 राजस्व जिलों का पुनर्गठनकर 13 नए जिले बनाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘विकसित दिल्ली इंटर्नशिप कार्यक्रम’ के अंतर्गत 85 युवाओं को जोड़ा गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि ग्रैप पाबंदियां के दौरान सरकार ने प्रत्येक योग्य श्रमिक को 10,000 रुपये की अनुग्रह राशि वितरित की। दिल्ली ग्रामीण विकास बोर्ड को सरकार ने पुनर्जीवित किया। इसके तहत लगभग 1,715 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली, 776 विकास परियोजनाएं पर कार्य किया जाएगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि वायु प्रदूषण आज हमारे शहर के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। स्वच्छ वायु कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। प्रदूषण नियंत्रण पर सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। पूर्व वर्षों की तरह केवल मौसमी उपायों तक सीमित रहने के बजाय सरकार ने जून 2025 में ही एक व्यापक वर्षभर लागू होने वाली और समयबद्ध वायु प्रदूषण न्यूनीकरण योजना आरंभ की। यह योजना रोकथाम, आधुनिक तकनीक के उपयोग, कड़े प्रवर्तन तथा जनभागीदारी पर केंद्रित है, जिसमें, सभी विभागों, स्थानीय निकायों और एनसीआर की एजेंसियों के समन्वित प्रयास शामिल हैं। वायु गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए 6 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत हरित आवरण का विस्तार किया जा रहा है।

सरकार ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को इस वर्ष 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिया है और आगे प्रति वर्ष 300 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। दिल्ली सरकार पीपीपी मॉडल के तहत होलंबी कलां में दिल्ली का पहला एकीकृत ई-वेस्ट ईको पार्क स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। सरकार बायोमाइनिंग और अपशिष्ट से ऊर्जा तकनीकों से गाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल को साफ कर रही है। 2027 तक की समयसीमा के तहत ट्रोमेल मशीनों और पीपीपी मॉडल के तहत कचरे के पहाड़ों पर जमा कूड़ा हटाकर दिल्ली को कचरा-मुक्त बनाने का लक्ष्य है। दिसंबर 2026 तक संशोधित ईवी नीति के तहत बसों के बेड़े में 7700 से अधिक स्वच्छ ईंधन बसें जोड़ी जाएंगी। सड़क धूल नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सभी श्रेणियों की सड़कों को शामिल करते हुए एक व्यापक सड़क पुनर्विकास एवं ग्रीनिंग योजना तैयार की गई है। दिल्ली को हरित शहर बनाने की प्रतिबद्धता के तहत अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य है। इस दिशा में आगामी चार वर्षों में लगभग 35 लाख वृक्ष तथा 63 लाख झाड़ियां लगाई जाएंगी। सरकार ने पीएम सूर्य घर योजना के तहत स्टेट सब्सिडी को 2000 रूपए प्रति किलोवाट के बढ़ाकर 10,000 रूपए प्रति किलोवाट कर दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव