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धमतरी, 05 जनवरी (हि.स.)। सिख धर्म के दसवें गुरु महान योद्धा- चिंतक और आध्यात्मिक पुरुष गुरु गोविंद सिंह की जयंती सोमवार को धमतरी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर सिख समाज द्वारा गुरुसिंह सभा गुरुद्वारा में पूरे दिन विविध धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह सात बजे गुरुद्वारा हाल में अखंड पाठ के साथ हुई। इसके पश्चात सुबह 10 बजे बच्चों द्वारा मधुर शबद कीर्तन की प्रस्तुति दी गई, जिसने संगत को भाव-विभोर कर दिया। सुबह 10:30 बजे रागी जत्था अरुण दीप द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसमें गुरु वाणी के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह के जीवन, त्याग और आदर्शों का संदेश दिया गया।
कीर्तन के दौरान गुरुद्वारा परिसर श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। दोपहर में संगत के लिए गुरु का लंगर आयोजित किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। लंगर सेवा में सिख समाज के महिला-पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। शाम के कार्यक्रमों में भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही।
सोमवार शाम सात बजे आरती का आयोजन किया गया, इसके बाद रात 8 बजे बच्चों द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया। रात्रि 11:30 बजे पुनः आरती संपन्न हुई, वहीं रात 12 बजे आतिशबाजी के साथ गुरु गोविंद सिंह की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। गौरतलब है कि गुरु गोविंद सिंह सिखों के 10 वें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर के बलिदान के पश्चात 11 नवंबर 1675 को गुरु पद संभाला। सन् 1699 में बैसाखी के पावन पर्व पर उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की, जो सिख इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। गुरु गोविंद सिंह जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने, मानवता, साहस और सेवा के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर समाज की महिला व पुरूष काफी संख्या में मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा