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वाराणसी, 03 जनवरी (हि. स.)। विधान परिषद सदस्य (स्नातक) चुनाव, वाराणसी खंड में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व कार्यकर्ता और पूर्व भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने पटखनी देकर जीत हासिल की थी। इस बार फिर से वाराणसी खंड में विधान परिषद सदस्य (स्नातक) चुनाव के लिए भाजपा के टिकट के लिए केदारनाथ सिंह की दावेदारी सबसे मजबूत है। केदारनाथ सिंह पूर्व में विधान परिषद सदस्य रह चुके है और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता भी रहे हैं। इस बार उनकी दावेदारी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व कार्यकर्ता ही चुनौती दे रहे हैं।
भाजपा के टिकट के लिए केदारनाथ सिंह की दावेदारी इस बार इतनी आसान नहीं है। विधान परिषद सदस्य स्नातक चुनाव के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पांच और पूर्व कार्यकर्ताओं ने भाजपा से टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इसमें महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष का नाम सर्वाधिक चर्चा में है। इसके बाद विद्यार्थी परिषद के पूर्व इकाई उपाध्यक्ष व बेसिक शिक्षा के एक सहायक अध्यापक का नाम दूसरे स्थान पर है, जो इस समय शिक्षकों के बीच जमकर प्रचार कर रहे हैं। तीसरे स्थान पर वरिष्ठ भाजपा नेता है, जो विद्यार्थी परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके हैं और काशी हिंदू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से आते है। इसी तरह विद्यार्थी परिषद के एक पूर्व कार्यकर्ता ने लखनऊ में भी नेतृत्व से संपर्क किया है और अपनी दावेदारी पेश की है। पांचवें नाम की चर्चा भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर मिर्जापुर तक जोरों पर है।
विद्यार्थी परिषद के पूर्व में सक्रिय कार्यकर्ता और पत्रकार शरद बाजपेई ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा संगठन होने का गौरव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को प्राप्त है। विद्यार्थी परिषद की भूमिका छात्रसंघ चुनाव में होती है, किंतु इसके पूर्व कार्यकर्ता अपनी भागीदारी हर चुनाव में निभाते दिखते हैं। विधान परिषद सदस्य स्नातक चुनाव में भी विद्यार्थी परिषद की भागीदारी लंबे समय से रही है। ऐसे में कोई पूर्व कार्यकर्ता अपनी दावेदारी कर रहे हैं तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। इसमें यह ध्यान रखना चाहिए कि राजनीतिक संगठन की ओर से जिसे प्रत्याशी बनाया जाए, उसका समर्थन सभी एक साथ करें। तभी वैचारिक जीत होनी संभव है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्री