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नैनीताल, 23 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिले की बदहाल सड़कों और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कूड़े के निस्तारण के लिए सात दिन का समय देते हुए कहा कि जनसुरक्षा से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शुक्रवार को अवकाशकालीन बेंच के न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सड़कों के गड्ढे भरने व सड़क किनारे जमा मलवे को हटाया जाएगा साथ ही कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। कोर्ट ने जिलाधिकारी, नगरपालिका नैनीताल और नगर निगम हल्द्वानी को स्पष्ट आदेश दिया है कि इन राजमार्गों से सारा जमा मलबा और ठोस कचरा तत्काल हटाया जाए। कोर्ट ने साफ किया है कि जनसुरक्षा से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने प्रशासन को सड़कों के किनारे से मलवा हटाने कूड़े के निस्तारण के लिए सात दिन का समय दिया है।
कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद, जिलाधिकारी नैनीताल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्रशासन युद्धस्तर पर कार्य करेगा। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर चिन्हित सभी मार्गों से निर्माण मलबा हटा दिया जाएगा और कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
मामले के अनुसार अनिल यादव ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल जिले के पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर अवैध डंपिंग किया गया है। यह मलबा न केवल यातायात को बाधित कर रहा है, बल्कि मानसून के दौरान फिसलन पैदा कर वाहनों के लिए खतरा बन रहा है। सड़कों पर सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर गायब हैं, जिससे स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों की जान हर समय जोखिम में रहती है।
हिन्दुस्थान समाचार / लता