जागरूक भारतीय युवाओं से सीखने का समय- डॉ. जितेन्द्र सिंह
नई दिल्ली, 23 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज का भारतीय युवा पहले से कहीं अधिक जागरूक और समझदार है। हमें उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए और उनसे सीखने के
डॉ. जितेन्द्र सिंह


नई दिल्ली, 23 जनवरी (हि.स.)।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज का भारतीय युवा पहले से कहीं अधिक जागरूक और समझदार है। हमें उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए और उनसे सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह बात पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित नेशनल स्किल समिट 2026 में कही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में अवसरों का लोकतंत्रीकरण हुआ है, जिससे युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। आज युवा अपने सपनों को न केवल देख पा रहे हैं, बल्कि उन्हें पूरा भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मेंटर्स और संस्थानों की भूमिका बदलनी चाहिए। उन्हें केवल उपदेश देने के बजाय युवाओं को सुनना और मार्गदर्शन करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अब सोच डिग्री तक सीमित नहीं रही है, बल्कि कौशल को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

सीएसआईआर की अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके तहत कई युवा, बिना बड़ी डिग्री के, लैवेंडर और सुगंधित फसलों की खेती करके अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले हम केवल आईटी सेक्टर पर ध्यान देते थे, लेकिन अब कृषि, पारंपरिक कौशल और स्थानीय क्षमताएं भी रोजगार का बड़ा साधन बन रही हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में युवाओं की आकांक्षाएं तेजी से बढ़ी हैं। नई शिक्षा नीति 2020 ने छात्रों को विषयों की मजबूरी से मुक्त किया है। अब छात्र अपनी पसंद के अनुसार विषय और करियर चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब छात्र अपने विषयों के “कैदी” नहीं हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि आज सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले छात्र टियर-2 और टियर-3 शहरों, गांवों और छोटे कस्बों से आ रहे हैं। इसी तरह, भारत के 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों के बाहर से शुरू हो रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज महिलाएं स्टार्टअप, विज्ञान और अंतरिक्ष मिशनों में नेतृत्व कर रही हैं। चंद्रयान-3 और आदित्य मिशन जैसे बड़े अभियान महिला वैज्ञानिकों के नेतृत्व में सफल हुए हैं। मुद्रा योजना के 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कभी कमी नहीं थी, कमी थी तो सही प्राथमिकता और राजनीतिक समर्थन की। आज वह कमी पूरी हो चुकी है। अब हमें विनम्र बनकर युवाओं की बात सुननी होगी और उनसे सीखना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी