सनातनी मुस्लिमों वाला अनोखा शुद्ध शाकाहारी नगर चितबड़ागांव
बलिया, 23 जनवरी (हि.स.)। बलिया में सूफ़ी संतों की नगरी चितबड़ागांव एक ऐसा अनोखा कस्बा है, जहां की हिन्दू-मुस्लिम एकता देश के लिए मिसाल है। इस कस्बे में लगभग पांच हजार से अधिक मुस्लिम आबादी होने के बावजूद मांस-मछली और अंडा तक नहीं बिकता है। एक ओर द
चितबड़ागांव कस्बा


बलिया, 23 जनवरी (हि.स.)। बलिया में सूफ़ी संतों की नगरी चितबड़ागांव एक ऐसा अनोखा कस्बा है, जहां की हिन्दू-मुस्लिम एकता देश के लिए मिसाल है। इस कस्बे में लगभग पांच हजार से अधिक मुस्लिम आबादी होने के बावजूद मांस-मछली और अंडा तक नहीं बिकता है।

एक ओर देश के धार्मिक स्थलों पर मांस और मछली की बिक्री रोकने की मांग उठ रही है। वहीं, देश और दुनिया में सनातन धर्म की बढ़ती लोकप्रियता के बीच बलिया जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर अनोखा नगर पंचायत चितबड़ागांव में हिन्दू तो हिंदू मुसलमान भी सनातन का सम्मान करते हैं। यहां मांस, मछली और अंडा तक नहीं बिकता है। न ही कोई इसका सेवन करता है। यहां तक कि किसी कसाई को कोई जमीन तक नहीं बेचता। 50 हजार आबादी वाले इस नगर पंचायत में लगभग छह हजार मुसलमान हैं। यहां समझना मुश्किल है कि कौन हिन्दू है और कौन मुसलमान। इस अनोखी सनातन नगरी में भगवान राम और सनातन की आस्था में डूबे लोग आज तक मांस, मछली और अंडा तक नहीं खाते और न ही यहां के बाजारों में बिकता है।

नगर पंचायत के वर्तमान चेयरमैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस अनोखी नगरी को देश और दुनिया के पटल पर अयोध्या जैसे धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की मांग की है। चेयरमैन अमरजीत सिंह ने कहा 52 गांव का यह नगर पंचायत पूरे देश और दुनिया का एक अनोखा नगर पंचायत है जो सनातन नगरी के रूप में मशहूर है। मगर इस सनातन नगरी में हिन्दू और मुसलमान स्वेच्छा से खुले तौर पर मांस का सेवन नहीं करते। न ही बाजारों में मांस बिकता है।

कस्बे के निवासी मोहम्मद मन्नू भाई बताते हैं कि चितबड़ागांव में कभी भी हिन्दू और मुस्लिम के बीच तनाव नहीं हुआ है। यह संतों की नगरी है। कहा कि देश के अन्य नगरों और गांवों में जहां दस घर भी मुसलमान हैं, वहां मांस बिकता है। मगर हमारे यहां आज तक नहीं बिका। कहा कि यह डर से नहीं, बल्कि हम स्वेच्छा से ऐसा करते हैं। क्योंकि यह गुलाल शाह और भीखा शाह की नगरी है। यहां मजार और रामशाला पर हिन्दू और मुसलमान एक साथ मत्था टेकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी