नेताजी का विचार आज भी राष्ट्रनिर्माण का मार्गदर्शन करता है : कुलपति प्रो. आनंद भालेराव
अजमेर, 23 जनवरी(हि.स.)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह कथन कि “बंदूक से पहले विचार मजबूत होने चाहिए” हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र का निर्माण केवल हथियारों से नहीं, बल्कि शिक्षित, चरित्रवान और अनुशासित नागरिकों से होता है। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्य
Netaji's thoughts still guide nation-building: Vice Chancellor Prof. Anand Bhalerao


Netaji's thoughts still guide nation-building: Vice Chancellor Prof. Anand Bhalerao


अजमेर, 23 जनवरी(हि.स.)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह कथन कि “बंदूक से पहले विचार मजबूत होने चाहिए” हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र का निर्माण केवल हथियारों से नहीं, बल्कि शिक्षित, चरित्रवान और अनुशासित नागरिकों से होता है। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमिका ऐसे ही राष्ट्रनिर्माताओं के निर्माण की है।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. आनंद भालेराव द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उन्होंने कहा कि नेताजी ने अपने जीवन में अनेक प्रतिष्ठित पदों का त्याग किया, क्योंकि उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। नेताजी का स्पष्ट मत था कि यदि नेतृत्व केवल समझौते की भाषा बोले और संघर्ष से डरे, तो वह नेतृत्व नहीं बल्कि प्रबंधन होता है। नेताजी का यह भी विश्वास था कि स्वतंत्रता के बाद भारत भावनाओं से नहीं, बल्कि सक्षम और दक्ष संस्थानों से चलेगा। आज जब हम राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नेक), नई शिक्षा नीति–2020 (निप-2020) और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (एनआईआरएफ) की बात करते हैं, तो यह नेताजी के उसी दूरदर्शी विज़न की आधुनिक अभिव्यक्ति है।

कुलपति प्रो. भालेराव ने कहा कि नेताजी का जीवन त्याग और आत्मविश्वास की पराकाष्ठा है। उनका यह कथन “यदि मैं जीवित रहा तो भारत स्वतंत्र होगा और यदि मैं शहीद हुआ तो भी भारत स्वतंत्र होगा” केवल वही व्यक्ति कह सकता है, जिसका जीवन स्वयं राष्ट्र को समर्पित हो। उन्होंने आगे कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देशवासियों से आह्वान किया था “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” आज के परिप्रेक्ष्य में यदि नेताजी होते, तो वे निश्चय ही कहते— “तुम मुझे संकल्प और प्रतिबद्धता दो, मैं तुम्हें विकसित भारत दूँगा।” राष्ट्र के प्रति यही संकल्प नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सच्ची श्रद्धांजलि है। यही विश्वविद्यालय का राष्ट्रधर्म भी है—कि वह युवाओं में कर्तव्यबोध, संकल्प और राष्ट्रनिर्माण की भावना को सुदृढ़ करे।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में महापुरुषों की जयंती मनाने की परंपरा इसलिए प्रारंभ की गई है, ताकि उनके जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर हम अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि हम ज्ञान को राष्ट्रसेवा से जोड़ेंगे, सुविधा नहीं कर्तव्य को प्राथमिकता देंगे और नेताजी के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। अंत में उप कुलसचिव मनीष भोमिया ने नेताजी के बलिदान को नमन करते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने किया। इससे पूर्व बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर कुलपति द्वारा माँ सरस्वती की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना की गई, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने सहभागिता निभाई। साथ ही कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उनका भव्य स्वागत किया गया जिसमें शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता निभाई तथा उपस्थितजनों ने अपने विचार साझा किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष