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काठमांडू, 23 जनवरी (हि.स.)। प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के संरक्षक तथा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबुराम भट्टराई ने गोरखा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 2 से दी गई अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। आगामी 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा निर्वाचन के लिए मनोनयन दायर करने के कुछ ही समय बाद उन्होंने अपना निर्णय बदलते हुए उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की।
भट्टराई ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों, शुभचिंतकों और मित्रों से उन्हें चुनाव न लड़ने का सुझाव मिला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक दल के सांसद बनकर उनकी भूमिका सीमित हो जाती, जबकि वर्तमान तरल राजनीतिक परिस्थिति में सभी के साझा अभिभावक की भूमिका निभाना अधिक उपयुक्त होगा। इसी सुझाव को स्वीकार करते हुए उन्होंने उम्मीदवारी वापस ली है। उन्होंने कहा कि अब वे संसद से बाहर रहकर ही राजनीतिक दलों को परामर्श, सुझाव और मार्गदर्शन देंगे।
शुरुआत में चुनाव न लड़ने और किसी कार्यकारी भूमिका में न रहने की घोषणा कर चुके भट्टराई ने देश में व्याप्त अनिश्चितता, भू-राजनीतिक चुनौतियों और संविधान की त्रुटियों को सुधारने के लिए संसद में अपनी उपस्थिति आवश्यक समझकर मनोनयन दायर किया था। भट्टराई ने सितंबर में हुए ‘जेन-जी विद्रोह’ को अपने द्वारा उठाए जा रहे सुशासन और समृद्धि के मुद्दों की पुष्टि करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि 70 वर्ष की आयु पूरी कर लेने के बाद अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपना चाहिए और स्वयं को अभिभावकीय भूमिका तक सीमित रखना चाहिए।
उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा), उज्यालो नेपाल पार्टी सहित नए दलों और पुराने दलों के भीतर अग्रगामी सोच रखने वालों को निस्वार्थ सहयोग देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। भट्टराई ने शांति प्रक्रिया के शेष कार्यों, सत्य निरूपण एवं मेलमिलाप तथा बेपत्ता आयोग से जुड़े विषयों को टुंगो तक पहुँचाने के लिए संसद से बाहर रहकर भी दबाव और सहयोग जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। उम्मीदवारी वापस लेते हुए उन्होंने उन्हें समर्थन देने और सुझाव देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास