Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय के फैसले पर लगाई मुहर, परिजनों की अपील खारिज
भोपाल, 23 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के जघन्य अपराध में दोषी ठहराए गए अतुल निहाले को दी गई तिहरी मृत्युदंड की सजा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है। आरोपित के परिजनों ने सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील को जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।
उल्लेखनीय है कि आरोपित अतुल निहाले (30 वर्ष) मजदूरी करता था। इससे पहले भोपाल की विशेष अदालत ने शाहजहांनाबाद क्षेत्र में घटित इस हृदयविदारक मामले में आरोपित को अपहरण, बलात्कार और हत्या तीनों अपराधों के लिए अलग-अलग मृत्युदंड सुनाया था। यह मध्य प्रदेश में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत तिहरे मृत्युदंड का पहला मामला माना जा रहा है।
अदालत ने माना कि यह अपराध न सिर्फ कानून के विरुद्ध है, बल्कि मानवता की मूल भावना को भी झकझोरने वाला है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि सत्र न्यायालय द्वारा दिए गए निष्कर्ष साक्ष्यों और परिस्थितियों के अनुरूप हैं। इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
घटना ने पूरे समाज को झकझोरा
यह मामला 24 सितंबर 2024 का है, जब मासूम बच्ची अपने चाचा के फ्लैट के पास खेलते समय लापता हो गई थी। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने तत्काल तलाश शुरू की, लेकिन दो दिन बाद बच्ची का शव आरोपित के घर की पानी की टंकी में बरामद हुआ। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अतुल निहाले को गिरफ्तार किया। मजदूरी करने वाला आरोपित पीड़ित के परिचित परिवेश से जुड़ा हुआ था, जिसने भरोसे और मासूमियत का क्रूर दुरुपयोग किया।
‘विरलतम से विरलतम’ की श्रेणी में रखा गया अपराध
भोपाल की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इसे “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का अपराध करार दिया था। फैसले में कहा गया था कि यह कृत्य न केवल एक मासूम जीवन का अंत है, बल्कि समाज की आत्मा पर गहरा आघात है। अदालत ने टिप्पणी की थी कि यदि मृत्युदंड से भी कठोर कोई सजा होती, तो वह भी इस अपराध के लिए कम पड़ती। अतुल निहाले को तीनों प्रमुख अपराधों के लिए मृत्युदंड के साथ-साथ विभिन्न धाराओं में दोहरे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई थी।
साक्ष्य छिपाने के मामले में परिजनों को भी सजा
इस मामले में अदालत ने आरोपित की मां बसंती निहाले और बहन चंचल को भी दोषी पाया। दोनों पर साक्ष्य छिपाने और जांच को प्रभावित करने का आरोप सिद्ध हुआ, जिसके चलते उन्हें दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अपराध के बाद की गई किसी भी प्रकार की सहायता भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे