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जबलपुर, 23 जनवरी (हि.स.)। मप्र हाईकोर्ट ने जिले के शहपुरा क्षेत्र में संचालित एक एथेनॉल प्लांट को लेकर सख्ती दिखाई है। पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और ग्रामीणों के जीवन पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों के आरोपों को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामला याचिकाकर्ता अमर गुप्ता एवं उनके अधिवक्ता प्रभात यादव द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से हाल ही में सामने आया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फैक्ट्री का संचालन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। याचिका में तहसील शाहपुरा के ग्राम नटवारा में स्थित मेसर्स श्री बालाजी बायो सॉल्यूशन फ्यूल्स एलएलपी पर एथेनॉल और बायो-फ्यूल उत्पादन के दौरान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रभात यादव के अनुसार प्लांट से निकलने वाला जहरीला अपशिष्ट और गंदा पानी आसपास के खेतों और जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और ग्रामीणों का पीने का पानी असुरक्षित हो चुका है। रासायनिक कचरे के कारण खेतों की उर्वरता खत्म हो रही है और फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा धुएं और मशीनों के शोर से वायु एवं ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर स्थानीय लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में यह एथेनॉल प्लांट चर्चा में तब आया जब भाजपा विधायक नीरज सिंह ने फैक्ट्री प्रबंधन पर करीब 400 क्विंटल चावल की हेराफेरी, सरकारी बोरियों से बोरी बदलकर ट्रकों से ढुलाई और जांच के दौरान नायब तहसीलदार को फैक्ट्री में प्रवेश न देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उस प्रकरण में भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे थे। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक