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शिमला, 23 जनवरी (हि.स.)। शिमला में तैनात ट्रैफिक पुलिस के एक कांस्टेबल को चिट्टा (हेरोइन) के साथ पकड़े जाने के बाद तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने का दावा कर रही है और इसी महीने 11 अन्य पुलिसकर्मियों को भी चिट्टा तस्करी से जुड़ाव के आरोप में सेवा से बाहर किया जा चुका है।
मामले के अनुसार 22 जनवरी को तड़के करीब 2:30 बजे शोघी बैरियर पर नियमित नाकाबंदी और जांच के दौरान चंडीगढ़ से शिमला की ओर आ रहे एक वाहन को रोका गया। वाहन में राहुल कुमार गौरव और विकास सवार थे। पुलिस द्वारा वाहन की विधिवत तलाशी लेने पर तीनों के कब्जे से कुल 9.480 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राहुल कुमार हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था और शिमला में ट्रैफिक पुलिस में तैनात था। पुलिस विभाग के एक सक्रिय सदस्य का इस तरह नशीले पदार्थों के मामले में सामने आना न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि विभाग की साख के लिए भी गंभीर माना जा रहा है।
इस मामले में पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई करते हुए राहुल कुमार और गौरव को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चिट्टा कहां से लाया गया था और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आरोपी कांस्टेबल राहुल कुमार को संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
सरकार का कहना है कि पुलिस का काम नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना और समाज को इस खतरे से बचाना है। ऐसे में अगर कोई पुलिसकर्मी खुद ही इस अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसे सेवा में बनाए रखना न सिर्फ गलत उदाहरण पेश करेगा बल्कि आम लोगों का भरोसा भी कमजोर करेगा।
इस घटना से पहले भी इसी महीने हिमाचल प्रदेश सरकार 11 पुलिसकर्मियों को चिट्टा तस्करी और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में बर्खास्त कर चुकी है। बर्खास्त किए गए कर्मियों में एक इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल शामिल थे। सरकार ने तब भी संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत कार्रवाई की थी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उनका कहना है कि अगर पुलिसकर्मी ही नशे के कारोबार में शामिल होंगे, तो समाज को इस खतरे से कैसे बचाया जा सकेगा। सरकार के अनुसार चाहे कोई भी पद पर हो, नशीले पदार्थों की तस्करी या अवैध ड्रग्स से जुड़े मामलों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा