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मोरीगांव (असम), 23 जनवरी (हि.स.)। ऐतिहासिक गोभा देवराजा के विनिमय प्रथा पर आधारित जोनबील मेले का आज दूसरे दिन काफी लोगों की भीड़ देखी गयी। दूसरे दिन के मेले की शुरुआत कड़ाके की ठंड के बीच सुबह जोनबील के तट पर लगने वाले पारंपरिक विनिमय हाट से हुई।
सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए मेले में आधुनिक मुद्रा का प्रयोग पूरी तरह स्थगित रखा गया और प्राचीन वस्तु-विनिमय प्रणाली के तहत लेन-देन किया गया।
पहाड़ी और मैदानी इलाकों से आए लोगों ने कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का आपस में आदान-प्रदान किया।
जोनबील मेला अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है। पारंपरिक विनिमय प्रथा आज भी इस मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश