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नोएडा, 18 जनवरी (हि.स.)। थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के सेक्टर-150 टी -प्वाइंट के पास बेसमेंट बनाने के लिए के खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में कार समेत डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने रविवार को दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने मामले में युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डर के खिलाफ बीएनएस की धारा-105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (1) (किसी व्यक्ति के द्वारा की गई लापरवाही या जल्दबाजी से किसी व्यक्ति की मृत्यु, धारा-125 (मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने) की धाराओं में केस दर्ज किया है।
इस घटना के बाद लोगों में काफी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि जिस जगह यह पर हादसा हुआ है, वहां 50 से अधिक सोसाइटी है। 20 से अधिक सोसाइटी में हजारों लोग रहते हैं। यहां कई जगह स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। सड़क भी टूटी हुई हैं। लोगों का कहना है कि एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार आईजीआरएस और विभिन्न माध्यमों से नोएडा प्राधिकरण से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। सोसाइटी से निकलने वाले पानी के लिए उचित निकासी की व्यवस्था नहीं है। सोसाइटियों के पीछे से निकलने वाली हिंडन नदी में पानी छोड़ने पर मना है। इस कारण बिल्डर की ओर से कई सोसाइटियों से बिना शोधित किए ही पानी को खुले नाले और खाली प्लॉट में छोड़ा जाता है। घटना स्थल के पास पीछे जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी मृतक के पिता राज कुमार मेहता ने बताया कि करीब 12 बजे उनके पुत्र का फोन आया था। पुत्र ने कहा कि वह नाले में गिर गया आकर बचाओ। पहले वह ऐस सिटी नाले के पास पहुंचे , लेकिन वह वहां नहीं मिला। करीब 30 मिनट तक वह घटना स्थल को ढूंढते रहे। जब वह घटना स्थल को ढूंढते हुए पहुंचे तो देखा कि उनका पुत्र कार की छत पर लेटा हुआ है। इसके बाद उन्होने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। उनके अनुसार उनका पुत्र बीच-बीच में बचाव-बचाव की आवाज लगा रहा था। इस दौरान उन्होंने टार्च जलाकर अपने जिंदा होने का भी उसने सबूत दिया। उन्होंने बताया कि सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल के कर्मियों ने पहले रस्सी फेंककर बचाव का प्रयास किया। मगर रस्सी उस तक नहीं पहुंची। क्रेन भी मंगवाई गई, वह भी उस तक नहीं पहुंची। जिस कारण राहत बचाव कार्य में देरी हुई। मौके पर कोई गोताखोर भी नहीं पहुंचा। इस कारण वह उनकी आंखों के सामने ही कार सहित डूब गया। बाद में सफलता नहीं मिलते देख एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों को बुलाया गया। कई घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद उन्होंने उनके पुत्र को बाहर निकाला, लेकिन तबतक उसकी मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि कोहरे के कारण इतना अंधेरा था कि पुलिस द्वारा बार-बार रस्सा फेंकने के बावजूद भी उनका पुत्र रस्सा नहीं पकड़ पा रहा था।
मालूम हो कि ग्रैंडियोस के समीप टी- प्वाइंट के पास शुक्रवार देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होने के बाद गहरे नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी थी। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस, दमकल टीम, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम ने कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 30 फीट गहरे पानी से युवक को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि घटना के संबंध में पीड़ित परिवार की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की दी गई है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्तान/सुरेश
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी