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प्रयागराज, 18 जनवरी (हि.स.)।
मौनी अमावस्या पर संगम स्नान को लेकर पुलिस प्रशासन के रवैये से नाराज़ ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज अब भी अपने शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हुए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उन्हें स्नान नहीं करने दिया जाता, तब तक वे न तो शिविर में प्रवेश करेंगे और न ही अपनी पालकी से उतरेंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्नान नहीं हुआ तो वे मेला छोड़ देंगे और भविष्य में कभी भी यहां अपना शिविर नहीं लगाएंगे।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि यह मेला अब सनातनियों का नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस-प्रशासन और तथाकथित वीआईपी लोगों के लिए सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रशासन की चाटुकारिता करते हैं, उनके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं, जबकि संतों और साधुओं की उपेक्षा हो रही है।
उन्होंने घटना का विवरण देते हुए बताया कि मौनी अमावस्या की सुबह वे अपने शिष्यों और भक्तों के साथ पालकी से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। गंगा से मात्र दस मीटर पहले पुलिस अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरने का आदेश दिया और आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्होंने इसे शंकराचार्य पद की गरिमा का अपमान बताया। इसके बाद सादे कपड़ों में आए लोगों ने उन्हें पालकी समेत उठाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर अंततः एक स्थान पर छोड़ दिया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनके शिष्यों और भक्तों के साथ अभद्रता की गई और कुछ लोगों के साथ मारपीट भी हुई, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार का धरना नहीं दे रहे हैं, बल्कि केवल स्नान की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं।
शंकराचार्य के मीडिया प्रवक्ता शैलेन्द्र योगी सरकार ने बताया कि महाराज अब भी अपने निर्णय पर अडिग हैं और पालकी पर बैठे हुए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल