पहले माता-पिता के मकान छोटे, मन बड़ा था, आज बच्चों केे मकान बडे़, मन छोटा है
कोटा, 18 जनवरी (हि.स.)। दिव्य गौसेवक संत पं.कमल किशोरजी नागर ने कहा कि पहले माता-पिता के मकान छोटे थे लेकिन उनका मन बड़ा था। आज कलिकाल में पढे़-लिखे बच्चों के मकान तो बडे़ हैं लेकिन उनका मन बहुत छोटा है। इसीलिये कई परिवारों में मर्यादायें टूट रही है
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