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जलपाईगुड़ी, 15 जनवरी (हि. स.)। तीन अक्टूबर 2023 को सिक्किम के लोनाक झील में आई आपदा का असर अब साफ दिखने लगा है। इस आपदा के बाद गाजोलडोबा में प्रवासी पक्षियों की संख्या और प्रजातियों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
पर्यावरणविदों के अनुसार, 2025-26 की गणना में प्रवासी पक्षियों की संख्या पिछले 28 वर्षों में सबसे कम रही है।
हिमालयन नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन और वन विभाग की संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में जहां लगभग 70 प्रजातियों के 10 हजार से अधिक पक्षी देखे गए थे, वहीं इस वर्ष 68 प्रजातियों के केवल करीब चार हजार 300 पक्षी मिले है। यह संख्या पिछले साल से भी लगभग एक हजार 200 कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तिस्ता नदी में गाद जमने से जलस्तर कम होना, नदी किनारे खेती, रेत-पत्थर डंपिंग और बढ़ता शहरीकरण इसके मुख्य कारण हैं। हालांकि इस बार तुंद्रा बीन गूज जैसी दुर्लभ प्रजाति के साथ ब्लैक नेक्ड ग्रीब और कॉमन मार्जेंसर भी देखे गए।
उधर, गाजोलडोबा से सटे फूलबाड़ी बैराज में प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़कर लगभग सात हजार हो गई है, जो पिछले साल से एक हजार अधिक है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि तिस्ता नदी के सामान्य होने पर पक्षी फिर लौटेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार