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-गोरखपुर की तरह गोरखगिरि धाम में भव्य खिचड़ी पर्व
महोबा, 15 जनवरी (हि.स.)। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का स्वागत करते हुए बुंदेलों के द्वारा मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखगिरि पर्वत पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में खिचड़ी पर्व मनाया गया। सभी श्रद्धालुओं को चावल और दाल की खिचड़ी बनाकर प्रसाद स्वरूप वितरित की गई और साथ ही उनको गुड़ और तिल के बने लड्डू खिलाए गए हैं।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने गुरुवार को बताया कि गोरखपुर की गोरक्षधाम पीठ की तरह ही जनपद मुख्यालय में स्थित गुरू गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखगिरि पर्वत पर भी हर वर्ष मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व मनाया जाता है और नाथ संप्रदाय के प्रणेता को याद किया जाता है। बताया कि त्रेतायुग में हिमाचल प्रदेश की सिद्ध ज्वाला देवी के भंडारे में पहुंचे गुरू गोरखनाथ भिक्षा में मिलने वाले चावल व दाल को ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की और भिक्षा मांगने निकल पड़े और गोरखपुर में राप्ती नदी तक आ पहुंचे। वे भूल गए कि वहां मां ज्वाला देवी ने खिचड़ी के लिए पानी गर्म करने को रख दिया। दान में मिले चावल-दाल को जब उन्होंने पकाया, उसी दिन मकर संक्रांति थी। फिर उन्होंने खिचड़ी सबको खिलाई। तभी से खिचड़ी बनाने और खिलाने का चलन जारी है। बताया कि जनश्रुति के अनुसार ज्वाला देवी में एक ऐसा कुंड है जहां आज भी पानी उबल रहा है और माता गुरू गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं। खिचड़ी पर्व के मौके पर गोरखगिरि पर्वत पर अवधेश गुप्ता, डा. देवेन्द्र, नीरज, अन्नू पुरवार, मनीष जैदका, दिलीप जैन, उपेन्द्र सुल्लेरे, कुक्कू शिवहरे, गया प्रसाद, मंटू, पवन सोनी, प्रेम व प्रवीण चौरसिया समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी