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काठमांडू, 15 जनवरी (हि.स.)। नेपाल के जेन जी मूवमेंट नामक संगठन ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व उपप्रधानमंत्री रवि लामिछाने के खिलाफ सहकारी ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के मुक़दमे वापस लेने के फैसलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
संगठन ने गुरुवार को जारी बयान में महा न्यायधिवक्ता पर अपराधियों को संरक्षण देकर कानून की सर्वोच्चता को कमजोर करने का आरोप लगाया। इस संगठन ने कहा कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक मूल्यों, पीड़ितों के न्याय के अधिकार और राज्य की जिम्मेदारी के खिलाफ हैं। बयान में यह भी याद दिलाया गया कि पहले ही महा न्यायाधिवकता सबिता भण्डारी को तत्काल हटाने की मांग की जा चुकी है, अब उन पर गंभीर अपराधों में संलिप्त एक गिरोह को अवैध रूप से संरक्षण देने के आरोप लगे हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि सुशासन और कानून के राज के लिए हुए जेन जी आन्दोलन में 76 लोगों की जान गई और 3,000 से अधिक लोग घायल हुए थे। ऐसे ऐतिहासिक बलिदानों की अनदेखी कर अपराधियों को बचाना अत्यंत आपत्तिजनक है। 9 सितंबर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि लामिछाने के समूह ने सत्ता हथियाने के उद्देश्य से जेल में घुसपैठ कर कैदियों को छुड़ाया और देशभर में अराजकता फैलाई।संगठन ने कहा कि सहकारी ठगी के लाखों पीड़ित आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कई लोग गंभीर मानसिक व शारीरिक पीड़ा झेल रहे हैं।
बयान में यह भी कहा गया है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। शक्तिशालियों के लिए विशेषाधिकार और पीड़ितों के लिए चुप्पी अस्वीकार्य है। इस संगठन ने प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और उनके द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता के खिलाफ सार्वजनिक बहिष्कार और नागरिक अवज्ञा का आह्वान किया है। साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने की संस्कृति को तत्काल समाप्त करने, महाधिवक्ता को हटाने तथा सहकारी ठगी के पीड़ितों के लिए निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास