नहीं थम रहा बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या का दौर
-रमेश शर्मा बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों और उनकी बर्बर हत्याओं का दौर रुक नहीं रहा। इसमें हिन्दु स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार का अध्याय भी जुड़ गया है। लेकिन भारत के अधिकांश वे राजनैतिक दल चुप हैं जिन्हें आतंकवादियों के भी मानवाधिकार की
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की बढ़ती घटनाएं


-रमेश शर्मा

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों और उनकी बर्बर हत्याओं का दौर रुक नहीं रहा। इसमें हिन्दु स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार का अध्याय भी जुड़ गया है। लेकिन भारत के अधिकांश वे राजनैतिक दल चुप हैं जिन्हें आतंकवादियों के भी मानवाधिकार की चिंता रहती है। पिछले सप्ताह काँग्रेस नेता जयराम रमेश और के वेणुगोपाल तो मीडिया से बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या का प्रश्न सुनकर ही भाग निकले।

यह वही बंगलादेश है जिसके निवासियों को कभी अपनी बांग्ला संस्कृति पर गर्व होता था और बांग्ला संस्कृति को सुरक्षित रखने केलिये संघर्ष किया था। उनके संघर्ष को सार्थक करने के लिये भारत ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। 1971 का युद्ध भी झेला था। इसमें भारत के लगभग 3900 जवानों का बलिदान हुआ था और लगभग दस हजार सैनिक घायल हुए थे। लाखों करोड़ का वित्तीय भार पड़ा सो अलग। बंगलादेश यदि अस्तित्व में आया है तो भारत के कारण लेकिनवही बंगलादेश अब भारत के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहा है और हिन्दुओं का जीना मुश्किल कर रहा है।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन को डेढ़ साल होने आ गया है। सत्ता परिवर्तन के साथ हिन्दुओं पर हमले आरंभ हुये जो रुकने का नाम नहीं ले रहे बल्कि हमलों की क्रूरता बढ़ रही है। बांग्लादेश अब जिस राह पर है, उसमें तीन बातें बहुत स्पष्ट हैं। एक पाकिस्तान के प्रति प्रेम और एकजुटता, दूसरी भारत के प्रति घृणा और तीसरी हिन्दुओं की हत्याएँ। तीनों प्राथमिकताएँ पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई और कट्टरपंथी संगठन जमायत-ए- इस्लामी की हैं। जमायत-ए-इस्लामी अपनी कट्टरता के लिये पूरी दुनिया में कुख्यात है। कई देशों ने तो इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। जबकि पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई को आतंकवाद की संरक्षक माना जाता है।

बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता परिवर्तन इन दोनों संस्थाओं की रणनीति थी। कहने के लिये वह छात्र आँदोलन था लेकिन परदे के पीछे यही दोनों संगठन थे। अब बंगलादेश में आईएसआई का कार्यालय खुल गया है। जमायत-ए-इस्लामी खुलकर चुनाव में भाग ले रही है। यह जमायत-ए- इस्लामी वही संस्था है जिसने 1971 में शेख मुजीबुरहमान के नेतृत्व चल रहे बांग्लादेश आंदोलन का विरोध किया था। जमायत-ए-इस्लामी पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र देश बनाने के पक्ष में कतई नहीं थी। यह आईएसआई और जमायत-ए-इस्लामी की सक्रियता ही है कि अब बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच आने-जाने के लिये वीजा के कई प्रावधान सरल कर दिये गये हैं।

बांग्लादेश में अब भारत को खुलेआम धमकियाँ भी दी जाने लगीं हैं। बांग्लादेश नेशनल सिटीजन पार्टी के प्रमुख हसनत अब्दुल्लाह ने तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है, को भारत से तोड़ने की धमकी भी दी है। इन राज्यों में अरुणांचल प्रदेश, मिजोरम, असम, मणिपुर, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा माने जाते हैं। बांग्लादेश के एक अन्य सेवानिवृत्त अधिकारी अब्दुल रहमान ने भी भारत के टुकड़े करने की धमकी दी है। इन धमकियों को साधारण नहीं समझा जा सकता। जिस प्रकार कट्टरपंथियों के स्लिपर सेल भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का षड्यंत्र रच रहे हैं उससे हसनत अब्दुल्लाह और अब्दुल रहमान की धमकियों को हल्का नहीं लिया जा सकता। तीसरे, बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले और हत्याओं के बढ़ते आँकड़े हैं। हमलों और हत्याओं के आँकड़े बढ़ने के साथ उनमें क्रूरता भी बढ़ रही है। हिन्दुओं पर हमले और हत्याओं का यह क्रम सत्ता परिवर्तन के पहले दिन से ही आरंभ हो गया था।

बांग्लादेश में ऐसा कोई गाँव नहीं जहाँ हिन्दुओं के घरों पर हमला न हुआ हो। बांग्लादेश सरकार ने अब ऐसे समाचारों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। समाचार पत्र ही नहीं वे सोशल मीडिया एकाउंट भी लॉक किये जा रहे हैं जो हिन्दुओं पर हमले और उत्पीड़न के समाचार प्रसारित कर रहे हैं। फिर भी चोरी-छिपे जो समाचार आ रहे हैं वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं।

हिन्दुओं पर अत्याचार के लिये कट्टरपंथी नित नया पैंतरा अपना रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के साथ घरों और मंदिरों पर हमले, चाकू या गोली मारकर हत्या का क्रम अब क्रूरता के साथ हत्या और जिन्दा जलाने की घटनाओं में बदल गया है। यह क्रूरता लगभग वैसी ही है जैसी सल्तनतकाल में हुआ करती थी। तब उसका उद्देश्य क्रूरता से हत्या करके हिन्दुओं को डराना था ताकि क्रूरता पूर्वक हत्याओं का यह दृश्य देखकर भयभीत हिन्दु धर्मांतरण कर लें। पिछले चौबीस दिनों में आठ हिन्दुओं की क्रूरता पूर्वक की गई हत्याओं में बर्बरता की वही झलक है। इन हत्याओं के अतिरिक्त एक हिन्दू स्त्री से बलात्कार और एक हिन्दू महिला अधिकारी को गालियाँ देकर जान से मारने की धमकी देने की घटना भी सामने आई है। इन बड़ी घटनाओं के अतिरिक्त बारह गाँवों में हिन्दुओं के घरों पर हमला करने के समाचार भी आये।

हत्याओं और हिन्दुओं के उत्पीड़न का यह नया दौर कट्टरपंथी उस्मान हादी की हत्या के बाद पुनः आरंभ हुआ। उस्मान हादी पर 12 दिसंबर 2025 को दो बाइक सवार हमलावरों ने ढाका के बिजयनगर क्षेत्र में किया था। उसे गोली मारी गई थी। उसे उपचार के लिये सिंगापुर ले जाया गया। जहाँ 18 दिसम्बर को उसकी मौत हो गई। हादी की मौत से हिन्दुओं का कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन उसकी मौत को बहाना बनाकर हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिन्दुओं के घर, व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही नहीं हिन्दुओं के संपादन में चल रहे समाचारपत्र कार्यालयों और साँस्कृतिक संस्थानों पर भी हमले हुये। इनमें ‘'प्रोथोम आलो'’और ‘'डेली स्टार’' समाचार पत्र और छायानात और उदिची शिल्पी जैसे साँस्कृतिक संस्थाओं के कार्यालय शामिल हैं।

जिस दिन हादी की मौत हुई उसी दिन 18 दिसम्बर को दीपू चंद्र दास नामक हिन्दु की क्रूरतापूर्वक हत्या की गई। दीपूदास की हत्या सीधे चाकू मारकर अथवा गोली मारकर नहीं की गई। पहले सारे कपड़े उतारे गये, फिर पीटा गया। अधमरा करके पेड़ से बांधकर जिन्दा जलाया था। कट्टरपंथियों ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया ताकि हिन्दुओं में भय व्याप्त हो। दूसरी हत्या 24 दिसंबर की रात को राजबाड़ी जिले के पांगशा में अमृत मंडल की गई। उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया और हिंसक भीड़ ने पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था। पुलिस अमृत मंडल को गंभीर अवस्था में पंगसा उपजिला स्वास्थ्य परिसर ले गई। रात करीब 2 बजे मंडल का निधन हो गया। तीसरी हत्या 30 दिसंबर को ब्रजेन्द्र विश्वास की हुई। ब्रजेन्द्र को उसी स्थान पर ले जाया गया जहाँ दीपू दास की हत्या की गई थी। बृजेंद्र बिस्वास को गोली मारकर हत्या करने वाला उसी का साथी नौमान मियां था। चौथी हत्या 31 दिसम्बर को हिंदू बिजनेसमैन खोकन चंद्र दास की हुई। यह हत्या शरियतपुर जिले के दामुड्या के कोनेश्वर यूनियन में केउरभंगा बाजार के पास हुई थी। वह रात लगभग 9:30 बजे अपनी फार्मेसी की दुकान बंद करके लौट रहा था तभी कट्टरपंथियों ने उसे रोका। पहले मारपीट की फिर शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। खोकन दास स्वयं को बचाने के लिये वहीं सड़क के किनारे तालाब में कूदा। आग देखकर और चीखें सुनकर भीड़ एकत्र हुई। दास को अस्पताल ले जाया गया जहाँ दास की मृत्यु हो गई। पाँचवीं हत्या पत्रकार राणा प्रताप वैरागी की हुई। यह हत्या जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर में सोमवार 5 जनवरी को की गई। कट्टरपंथियों ने राणा प्रताप को आवाज लगाकर रोका और भरी दोपहर सरेआम गोली मार दी। छठी हत्या इसी दिन व्यवसायी मणि चक्रवर्ती की हुई। वे मणि चक्रवर्ती से पैसा वसूलना चाहते थे। इसी बीच 11 जनवरी को हिन्दू नेता और संगीतकार प्रोलय चाकी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई है। वे बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी के सीनियर नेता थे। आठवीं मौत समीर की हुई। समीर रामानंदपुर गांव का रहने वाला था और रिक्शा चलाता था। रात लगभग दो बजे दक्षिण करीमपुर मुहुरी बाड़ी के पास समीर की लहूलुहान लाश मिली।

बांग्लादेश में हिन्दुओं के दमन को रोज नया तरीका अपनाया जा रहा है। एक हिन्दू महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और एक हिन्दू महिला अधिकारी को धमकी देने की घटना सामने है। हिंदू महिला के साथ बलात्कार की यह घटना झेनैदाह जिले के कालिगंज में नादिपारा क्षेत्र की है। चालीस वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ पहले दो लोगों ने बीच सड़क पर बलात्कार किया, फिर पेड़ से बांधकर उसके बाल काट दिए। कट्टरपंथियों ने इस घटना का भी वीडियो बनाकर वायरल किया।

बांग्लादेश के कट्टरपंथी प्रशासन के हिन्दू कर्मचारियों और अधिकारियों को भी धमका रहे हैं। बांग्लादेश में इन दिनों चुनाव प्रक्रिया चल रही है। फरवरी में चुनाव होना है। कुरिग्राम-3 निर्वाचन क्षेत्र से जमायते इस्लामी के उम्मीदवार बैरिस्टर सालेही ने चुनाव लड़ने के लिये अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। सालेही बांग्लादेश के साथ ब्रिटेन के भी नागरिक हैं। दोहरी नागरिकता के आधार पर उनका नामांकन निरस्त हो गया। इस जिले में हिन्दू महिला अधिकारी अन्नपूर्णा देबनाथ डिप्टी कमिश्नर के रूप में तैनात हैं। अपना नामांकन निरस्त होने पर सालेही ने अन्नपूर्णा देवनाथ दबाव बनाया। जब अन्नपूर्णा देवनाथ ने नियमों का उल्लेख किया था। वहाँ उपस्थित सालेही समर्थकों ने उनके साथ भारी अभद्रता की, हिन्दू होने के कारण गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी। यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है।

हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों पर राजनैतिक चुप्पी के मायने

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे राजनैतिक दल और नेता हैं जो मानवाधिकार के लिये सदैव सचेत रहते हैं। वे आतंकवादियों और दंगाइयों के भीतर भी मानवीय अस्तित्व खोजकर उसके संरक्षण की बात करते हैं। भारत में ही नहीं सुदूर हमास के आतंकवादियों के प्रति भी मानवीय आधार पर संवेदना व्यक्त की जाती है। लेकिन हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार और दमन पर सदैव चुप्पी रहती है। ऐसी चुप्पी पहले कश्मीर में देखी गई, मुर्शिदाबाद में देखी गई और अब बांग्लादेश में भी देखी जा रही है। यही नहीं मीडिया से बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार का हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार का प्रश्न सुनकर काँग्रेस के दो नेताओं द्वारा मुँह छिपाकर भागने का यह दृश्य पिछले दिनों वायरल हुआ। ये नेता श्री जयराम रमेश और श्री के वेणुगोपाल हैं। वे मीडिया से चर्चा कर रहे थे। इसी बीच एक पत्रकार ने बंगलादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार का प्रश्न पूछ लिया। प्रश्न सुनते ही दोनों उठकर चल दिये। इसी काँग्रेस के दो अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पिछले सप्ताह दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपियों की जमानत न होने पर कोर्ट की कार्रवाई पर भी प्रश्न उठाए थे। दिल्ली दंगों के ये आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार नहीं की। इस पर काँग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं इमरान मसूद और राशिद अल्वी ने मानवीय आधार पर अनुचित माना। ये वही राशिद अल्वी हैं जिन्होंने पिछले सप्ताह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने को अनुचित बताया था और कहा था कि इससे पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हो रही है।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश