भारत को विश्वगुरू बनाने के लिए हमें विवेकानन्द को पढ़ना ही नहीं बल्कि जीना होगा : प्रान्त प्रचारक
गोरखपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। भारत सांस्कृतिक एवं नैसर्गिक रूप से एक रहा है। हमारा आध्यात्मिक तत्व चिंतन है। वह चिंतन पूर्णता का है, समग्रता का है, टुकड़े-टुकड़े का नहीं। यदि भारत को जानना है तो स्वामी विवेकानन्द जी को पढ़ना होगा। स्वामी विवेकानन्द ने
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