न्यायिक अफसर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दिया है, जिसमें एक न्यायिक अफसर की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए बहाल करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि न्य
न्यायिक अफसर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था: सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दिया है, जिसमें एक न्यायिक अफसर की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए बहाल करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि न्यायिक अफसर का इस तरह का बर्ताब बेहद खराब है और उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था।

न्यायिक अफसर पर आरोप था कि उसने ट्रेन में हंगामा किया और महिला यात्री के सामने अश्लील हरकत की और ट्रेन के डिब्बे में पेशाब भी की। कोर्ट ने इस मामले को हैरान करने वाला और अफसर के व्यवहार को बेहद घिनौना बताया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस अफसर की मेडिकल जांच रिपोर्ट बताती है कि वह घटना के वक्त नशे में नहीं थे।

मामला मध्यप्रदेश में सिविल जज द्वितीय श्रेणी को 2018 में ट्रेन में उपद्रव करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। उन पर नशे की हालत में ट्रेन में बैठे दूसरे यात्रियों के साथ गलत व्यवहार करने और टीटीई को गाली देने का आरोप था। न्यायिक अधिकारी को बाद में आपराधिक कार्यवाही में बरी कर दिया गया था क्योंकि गवाह मुकर गए थे लेकिन विभागीय कार्यवाही के दौरान कई लोगों ने सिविल जज के अश्लील बर्ताव और अधिकारों के दुरुपयोग के बारे में बताया।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा