एपीओ भर्ती में चयनित चारों अभ्यर्थियों सहित असफल हुए दस अभ्यर्थियों की कॉपी करें पेश-हाईकोर्ट
जयपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2024 में सिर्फ चार अभ्यर्थियों के पास होने के मामले में आरपीएससी को निर्देश दिए हैं कि वह इन चयनित अभ्यर्थियों सहित परीक्षा में असफल रहे किन्हीं 10 अन्य अभ्यर्थियों की कॉपी अ
काेर्ट


जयपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2024 में सिर्फ चार अभ्यर्थियों के पास होने के मामले में आरपीएससी को निर्देश दिए हैं कि वह इन चयनित अभ्यर्थियों सहित परीक्षा में असफल रहे किन्हीं 10 अन्य अभ्यर्थियों की कॉपी अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश करे। वहीं अदालत ने याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा में प्राप्त किए गए कुल अंकों की जानकारी भी सारणीबद्ध तरीके से देने को कहा है। अदालत ने कहा है कि 15 जनवरी को आरपीएससी सचिव या उनकी ओर से मामले को जानने वाला अधिकृत सक्षम अधिकारी अदालत में हाजिर हो। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सृष्टि सिंघल व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान आरपीएससी के सचिव वीसी के जरिए अदालत से जुडे। तकनीकी बाधा के चलते उनकी ओर से अदालत में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई टालते हुए अभ्यर्थियों की कॉपियां पेश करने के आदेश देते हुए अधिकारी को तलब किया है।

याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि आरपीएससी ने सहायक अभियोजन अधिकारी के 180 पदों भर्ती निकाली थी। जिसमें मुख्य परीक्षा में करीब तीन हजार अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा में एक प्रश्न पत्र विधि और एक प्रश्न पत्र हिंदी व अंग्रेजी भाषा का रखा गया था। लिखित परीक्षा के बाद आयोग ने सिर्फ 4 अभ्यर्थियों को ही सफल घोषित किया और आयोग के परिणाम के अनुसार अन्य सभी अभ्यर्थी न्यूनतम अनिवार्य चालीस फीसदी अंक भी नहीं ला सके। याचिका में कहा गया कि भर्ती परीक्षा में शामिल कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में चालीस फीसदी से अधिक अंक हासिल किये थे। आरजेएस परीक्षा सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती परीक्षा से कहीं अधिक कठिन परीक्षा मानी जाती है। इसके बावजूद ऐसे अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में असफल कर दिया गया। याचिका में कहा गया कि आयोग की ओर से जारी यह परिणाम मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है। याचिका में आशंका जताई गई है कि परीक्षा के मूल्यांकन में त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर और अत्यधिक कठोर अंकन कर मषीनी अंदाज में कॉपियां जांची गई है। ऐसे में परीक्षा परिणाम को रद्द कर नए सिरे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर संशोधित परिणाम जारी किया जाए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पारीक