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मीरजापुर, 11 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर के बरकछा स्थित बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में अब खेतों की खुशबू सिर्फ वातावरण ही नहीं महकाएगी, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ाएगी। साउथ कैंपस में अत्याधुनिक स्वदेशी भाप आसवन इकाई के शुरू होने से औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को नई दिशा मिली है। यह इकाई किसानों के लिए तकनीक, बाजार और मूल्य—तीनों को जोड़ने वाली कड़ी बनकर उभरी है।
आचार्य प्रभारी प्रो. बीएमएन कुमार के अनुसार यह बहुउद्देशीय इकाई कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है। पामारोसा, जरेनियम, मेंथा, तुलसी, गुलाब, लैवेंडर, सिट्रोनेला, चमेली, वेटिवर और चंदन जैसे पौधों से उच्च गुणवत्ता के सुगंधित और औषधीय तेल अब स्थानीय स्तर पर ही तैयार किए जा सकेंगे। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर अधिक लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
सबसे खास बात यह है कि किसान अपनी सुगंधित फसलों का प्रसंस्करण न्यूनतम और पारदर्शी शुल्क पर साउथ कैंपस में करा सकेंगे। यह व्यवस्था न केवल उनकी लागत घटाएगी, बल्कि मूल्य संवर्धन के जरिए आय में भी बढ़ोतरी करेगी।
व्यावसायिक उपयोग से आगे बढ़कर यह इकाई अनुसंधान और कौशल विकास का केंद्र भी बनेगी। यहां छात्र, किसान और उद्यमी आधुनिक कृषि-प्रसंस्करण तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। यह पहल विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती देने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा