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नई दिल्ली, 10 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय में शनिवार काे भी आवारा कुत्तों को लेकर सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील और पशु अधिकार कार्यकर्ता महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि कुछ लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के बारे में अपमानजनक बातें करते हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान पावनी ने बड़े पैमाने पर अवैध प्रजनन और विदेशी कुत्तों के अवैध आयात के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पिट बुल और हस्की नस्ल के कुत्तों को सड़क पर छोड़ा जा रहा है। तब कोर्ट ने कहा कि ये मामला आवारा कुत्तों से जुड़ा नहीं है, कृपया उन मसलों पर ध्यान दें जिनसे हम निपट रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून में उपलब्ध उपायों का पालन किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से इस मामले में दखल न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करने की जरुरत नहीं है। सिंघवी ने कहा कि संसद जानबूझकर दखल नहीं देती तो कोर्ट को भी इस मामले में नहीं जाना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने 8 जनवरी को कहा था कि कुत्तों को इंसान के डर का आभास हो जाता है। जब उन्हें लगता है कि सामने वाला डरा हुआ है तो वो उस पर हमला कर देते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी