केआईबीजी 2026: प्रसन्ना बेंद्रे ने पेंचक सिलाट में बरकरार रखी बादशाहत, सिर्फ 20 दिनों में नए वजन वर्ग में रचा इतिहास
दीव, 10 जनवरी (हि.स.)। दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव के स्टार पेंचक सिलाट खिलाड़ी प्रसन्ना बेंद्रे ने एक बार फिर अपने जज़्बे और मेहनत से सभी को प्रभावित किया। खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी) 2026 में उन्होंने टांडिंग स्पर्धा में लगातार दूसरी
पेंचक सिलाट खिलाड़ी प्रसन्ना बेंद्रे


दीव, 10 जनवरी (हि.स.)। दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव के स्टार पेंचक सिलाट खिलाड़ी प्रसन्ना बेंद्रे ने एक बार फिर अपने जज़्बे और मेहनत से सभी को प्रभावित किया। खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी) 2026 में उन्होंने टांडिंग स्पर्धा में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की, वह भी ऐसे हालात में जब उन्हें महज 20 दिनों में अपना वजन वर्ग बदलना पड़ा।

प्रसन्ना अपने घरेलू मैदान पर 40-45 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक का बचाव करना चाहते थे, लेकिन प्रतियोगिता से ठीक पहले वजन वर्गों में बदलाव कर दिया गया। केआईबीजी 2026 में टांडिंग स्पर्धा में उनका नियमित वजन वर्ग शामिल नहीं था, जिसके चलते उन्हें या तो 50-55 किग्रा वर्ग में उतरना था या फिर प्रतियोगिता से बाहर होना था।

23 वर्षीय प्रसन्ना ने हार मानने के बजाय चुनौती को स्वीकार किया। सिर्फ 20 दिनों में उन्हें न केवल वजन बढ़ाना था, बल्कि खुद से ज्यादा ताकतवर खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से भी तैयार होना था। उन्होंने फाइनल में मणिपुर के रोहित मैतेई को हराकर घोघला बीच, दीव में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

प्रसन्ना ने बताया, साई मीडिया के हवाले से कहा,“इन खेलों से पहले मैं श्रीनगर में राष्ट्रीय कैंप में था। लौटने पर पता चला कि मेरा 40-45 किग्रा वर्ग केआईबीजी 2026 में नहीं होगा और खेलों में सिर्फ 20 दिन बचे थे। मेरे पास वजन वर्ग बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। चुनौती यह थी कि मेरे प्रतिद्वंद्वी पहले से ही उस वजन में ज्यादा मजबूत थे।”

उन्होंने कहा, “मैंने खजूर, केला, अंजीर और अन्य चीजों को मिलाकर शेक बनाना शुरू किया, जिसे दिन में दो बार पीता था। इतने कम समय में वजन बढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन किसी तरह मैं 50-51 किलो तक पहुंच सका।”

इससे पहले प्रसन्ना पुरुष सीनियर तुंगगल स्पर्धा में रजत पदक भी जीत चुके थे। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच एलेक्जेंडर और फिलिया थॉमस को दिया, जिन्होंने नए वजन वर्ग में भी उन्हें अपनी तकनीक पर भरोसा रखने के लिए प्रेरित किया।

प्रसन्ना का पेंचक सिलाट से जुड़ाव भी रोचक रहा। उन्होंने बताया, “मैं कक्षा 8 में ट्यूशन के लिए उनके घर जाता था, वहीं उनके मार्शल आर्ट्स बैकग्राउंड के बारे में पता चला। उसी समय वे दमन आए थे और अकादमी शुरू करने की योजना बना रहे थे। मैं सही समय पर सही जगह था और ऑनर अकादमी का पहला छात्र बना।”

प्रसन्ना 2024 में अबू धाबी में हुई विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष आठ में जगह बना चुके हैं।

हालांकि, उनकी सफलता की राह आसान नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें गंभीर आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, “अबू धाबी जाने के लिए मेरे पिता, जो एक निजी कंपनी में काम करते हैं, उन्हें लगभग एक लाख रुपये का कर्ज लेना पड़ा। बाकी रकम दमन की मराठी कम्युनिटी से फंडरेज़र के जरिए जुटाई गई। वह कर्ज आज भी चुकाया जा रहा है।”

ऐसा ही संघर्ष 2023 एशियन चैंपियनशिप (दुबई) के दौरान भी रहा, जहां उन्होंने 40-45 किग्रा टांडिंग में कांस्य पदक जीता था। वहीं 2022 में कश्मीर में हुई एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

राजस्थान के माधव विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में मास्टर्स कर चुके प्रसन्ना को 2025 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप परीक्षा के कारण छोड़नी पड़ी थी। अब पढ़ाई पूरी होने और एक और खेलो इंडिया स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका फोकस खेल और परिवार की जिम्मेदारियों पर है।

ऑनर अकादमी में सहायक कोच की भूमिका निभा रहे प्रसन्ना बेंद्रे ने कहा, “मेरे पिता अगले साल रिटायर हो रहे हैं, इसलिए परिवार की जिम्मेदारी मुझे उठानी होगी। इसके लिए नौकरी तलाशना मेरी प्राथमिकता है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे