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चेन्नई, 15 जुलाई (हि.स.)। एक प्रसिद्ध क्लाइमेट थिंक टैंक की रिपोर्ट से पता चला है कि तमिलनाडु अगले पांच साल में फ्लोटिंग सोलर प्लांट (पानी पर लगने वाले सोलर प्लांट) अपनाकर पूरे 16,000 करोड़ रुपये बचा सकता है। इस स्टडी से पता चलता है कि फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी राज्य की बिजली लागत को काफी कम कर सकती है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोटिंग सोलर प्लांट पानी में मौजूद ढेर सारी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जमीन खरीदने का खर्च बचता है और ऊर्जा ज़्यादा असरदार तरीके से इस्तेमाल होती है। थिंक टैंक का अनुमान है कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके तमिलनाडु बड़ी मात्रा में रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पैदा कर सकता है, जिससे बिजली खरीदने के खर्च में अच्छी-खासी बचत होगी।
रिपोर्ट में फ्लोटिंग सोलर प्लांट के पर्यावरणीय फायदों पर भी जोर दिया गया है। ये ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं। तमिलनाडु का लक्ष्य अपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को बढ़ाना है, और इसमें फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी एक अहम भूमिका निभा सकती है। थिंक टैंक ने राज्य सरकार से फ्लोटिंग सोलर प्लांट के विकास को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
इस रिपोर्ट के नतीजों से फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी में नए सिरे से दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। संभावित निवेशक और हितधारक इस क्षेत्र में लाभप्रद अवसरों पर ध्यान देंगे। जैसे-जैसे राज्य सरकार अपने रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को पूरा करने के तरीके तलाश रही है, वैसे-वैसे फ्लोटिंग सोलर प्लांट जैसे नए समाधानों को अपनाने से तमिलनाडु टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन में एक लीडर के रूप में उभर सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ आर बी चौधरी