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कोरबा, 08 दिसम्बर (हि. स.)। “प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन स्थापित कर जनजाति समाज विश्व को प्रेरणा देता है। जनजातीय संस्कृति भारत की ऐसी विरासत है, जो हमें वैश्विक मंच पर गौरव और सम्मान दिलाती है,” यह उद्गार जेबीडी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय कटघोरा के प्राचार्य प्रोफेसर प्यारेलाल आदिले ने व्यक्त किए। वे आज सोमवार को शासकीय नवीन महाविद्यालय जटगा में आयोजित जनजाति गौरव दिवस पर मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
प्रो. आदिले ने कहा कि भारतीयों को अपनी मौलिक दर्शन और ज्ञान परंपरा को समझते हुए ऐतिहासिक विरासत को और अधिक सशक्त बनाना होगा। उन्होंने शिक्षा को समावेशी विकास का प्रमुख माध्यम बताते हुए कहा कि संविधान के प्रावधानों को मजबूत रूप से लागू कर ही हम बेहतर मानव संसाधन के रूप में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि सहित उपस्थित अतिथियों का स्वागत हेमलता यादव, अजय कुमार, पूजा यादव, लक्ष्मी, दुर्गा, तमन्ना, देवेंद्र और किया द्वारा किया गया। कार्यक्रम का रूपरेखा प्रस्तुतीकरण प्रो. दलीप कुजूर ने किया तथा अतिथियों का परिचय भी उन्होंने ही दिया।
स्थानीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जटगा की प्राचार्य तारा सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनहरण अनंत ने कहा कि लोकतंत्र के वास्तविक जनक जनजाति समाज ही है। उनसे लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा लेकर हमें शिक्षा की दिशा में सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को भविष्य निर्माण का आधार मानते हुए लगन से अध्ययन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. फिरत राम ने किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों में हेमलता यादव और अजय कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पुरुषोत्तम सिंह तंवर, तन्मय लोहनी, सौम्या मरावी, सरोज ध्रुवे, शकुनि धनवार, शकुंतला दास, मीनू दीवान एवं कृष्णा तंवर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हिन्दुस्थान समाचार/हरीश तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी