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जगदलपुर, 8 दिसंबर (हि.स.)। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों में संचार का अभाव लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। बस्तर संभाग में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए खड़े किए गऐ संचार तंत्र अब सुरक्षा बलों की सबसे मजबूत ढाल बन चुका है। इसीलिए नक्सलियाें द्वारा मोबाइल टावरों काे अकसर आग के हवाले कर देते हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए अब इन इलाकाें के सुरक्षा कैंपाें में मोबाइल टाॅवर स्थापित किये जा रहे हैं।
साेमवार काे जारी विज्ञप्ति के अनुसार बस्तर संभाग में स्थापित 728 मोबाइल टावरों ने पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों की क्षमताएं कई गुना बढ़ा दी हैं। 728 स्थापित नए मोबाइल टावर, जिनमें 467 टावर विशेष रूप से 4-जी नेटवर्क के लिए लगाए गए हैं। साथ ही 449 टावरों को 2-जी से 4-जी में अपग्रेड किया गया है। इससे सुरक्षा बलों को न केवल बेहतर संचार सुविधा मिली है, बल्कि नक्सल प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों तक भी अब बगैर किसी बाधा के नेटवर्क सेवा पहुंचने लगी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अगस्त 2025 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में रायपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह तय किया गया था कि नक्सलवाद से निपटने के लिए पड़ोसी राज्य रियल टाइम सूचना साझाकरण प्रणाली पर मिलकर काम करेंगे । इस सिस्टम के शुरू होने से नक्सलियों की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नजर रखी जा रही है। नतीजतन, प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों और मूवमेंट को सुरक्षा बल समय रहते पकड़ पा रहे हैं, और नक्सली लगातार सुरक्षा एजेंसियों के रडार में बने हुए हैं। सुरक्षा बल के जवान अब इन टावरों का तकनीकी रूप से सदुपयोग कर नक्सलियों की गतिविधियों को ट्रैक करने में सक्षम हो रहे हैं।
प्रदेश में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और विकास दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति तेजी से आगे बढ़ रही है। विष्णुदेव सरकार आने के बाद 69 नए सुरक्षा कैंप खोले गए हैं। इन कैंपों के आसपास स्थित 403 गांवों में नौ विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं और 11 विभागों की 25 व्यक्ति मूलक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। पहली बार इन दुर्गम गांवों तक योजनाओं की सीधी पहुंच बनाई गई है, जिससे विकास कार्यों में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री साय का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकाें में मोबाइल नेटवर्क का पहुंचना सिर्फ एक टाॅवर का खड़ा होना नहीं है, यह उन लोगों के सपनों का उठ खड़ा होना है जो वर्षों से दुनिया से कटे हुए थे । यह सिर्फ संचार की शुरुआत नहीं, बल्कि विश्वास, बदलाव और नई संभावनाओं के युग का आरंभ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे