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कोलकाता, 08 दिसंबर (हि.स.)। ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार ने सोमवार को संसद में इस प्रतिष्ठित गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई पहल की सराहना की है। परिवार का कहना है कि यह सम्मान लंबे समय से अपेक्षित था और इससे बंकिमचंद्र की ऐतिहासिक भूमिका को उचित स्थान मिला है।
‘वंदे मातरम्’ नवंबर 1875 में लिखा गया था और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्तों का प्रेरणास्रोत बना।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के पौत्र सजल चट्टोपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने इस महान साहित्यकार की उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है वह बंगाल और हिन्दू समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। मैं केंद्र सरकार को सलाम करता हूं। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय देश के पहले स्नातक थे, लेकिन उनके नाम पर कुछ भी नहीं है, सिर्फ उनकी संपत्ति ही उनकी पहचान बनी हुई है। मेरा मानना है कि जैसे रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाम पर विश्वविद्यालय हैं, वैसे ही हर राज्य में एक विश्वविद्यालय बंकिमचंद्र के नाम पर होना चाहिए। संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने उनके बारे में जो कहा, वह अत्यंत सम्मानजनक है।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर संसद में चर्चा शुरू करने के बाद चट्टोपाध्याय परिवार की यह प्रतिक्रिया सामने आई है।
सजल चट्टोपाध्याय ने यह भी मांग की कि पश्चिम बंगाल में ‘रविन्द्र भवन’ की तरह ‘बंकिम भवन’ भी स्थापित किए जाए। उन्होंने कहा कि रविन्द्र भवनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, लेकिन बंकिमचंद्र की विरासत को आगे बढ़ाने वाला कोई भवन नहीं है। संसद में ‘जन गण मन’ पहले स्वरूप में और अंत में ‘वंदे मातरम्’ वाद्य-संगीत में बजता है। हम चाहते हैं कि ‘वंदे मातरम्’ भी स्वरूप में बजाया जाए।”
उल्लेखनीय है कि, पिछले माह प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया था कि 1937 में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में कांग्रेस ने अपने अधिवेशन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के महत्वपूर्ण अंशाें को हटा दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि ऐसी ही गलतियों ने देश के बंटवारे की जमीन तैयार की और राष्ट्रीय गीत को टुकड़ों में बांट दिया।---------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर