Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

- भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन देश-विदेश के जुटे शिक्षाविद
अयोध्या, 8 दिसंबर (हि.स.)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक समृद्ध और विविध विरासत है, जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि विज्ञान, कला, सामाजिक व्यवस्था और जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं को समाहित करती है। यह परंपरा केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि छात्रों में नैतिकता, आत्मविश्वास, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर विशेष बल देती है।
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह आज डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस- 13 वें इंटरनेशनल साइंस कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन इंटरनेशनल साइंस कम्युनिटी एसोसिएशन एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस अवसर पर विशिष्ट शिक्षाविदों में त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल की प्रो. सुशीला देवी श्रेष्ठ, बोत्सवाना विश्वविद्यालय रसायन विज्ञान के प्रो. गिरजा शंकर सिंह रहे।
उद्घाटन सत्र में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक समृद्ध और विविध विरासत है, जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि विज्ञान, कला, सामाजिक व्यवस्था और जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं को समाहित करती है। उन्हाेंने आगे कहा कि विकास के नाम पर जल, भूमि और पर्यावरण को प्रदूषित किया गया है। आधुनिक विकास प्राकृतिक संसाधनों को खो कर किया गया है। भारत की कृषि परंपरा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में फसलों की बुवाई व कटाई के लिए भी नक्षत्रों का ज्ञान भारतीयों को था। कृषि के लिए मुहूर्त तक देखा जाता था। उससे उन्हें अच्छी फसल मिलती थी। अब इसे विज्ञान कॉस्मिक एनर्जी के रूप में देख रहा है।
प्रो. गिरजाशंकर सिंह ने बताया कि विज्ञान, तकनीक, कृषि भारतीय ज्ञान परंपरा का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। महान शिक्षाविद पं. महामना मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना इसी उद्देश्य को लेकर की थी जो आज वैश्विक पटल पर स्वयं को सिद्ध कर रहा है।इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती जी के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पर्चन से किया गया। इसी सत्र में इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड रिसर्चर 2025 प्रो. दयानंद मिजोरम एवं गुजरात विश्वविद्यालय की प्रो. संगीता शर्मा, नागपुर महाराष्ट्र की डॉ. कविता गौर, आरा विश्वविद्यालय बिहार के प्रो. विनय कुमार मिश्र एवं देहरादून उत्तराखंड की डॉ. स्तुति गुप्ता को विशिष्ट शैक्षिक उपलब्धि के लिए प्रदान किया गया। इस अवसर पर कॉन्फ्रेंस की पत्रिका एवं एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 20 तकनीकी सत्रों में किया जाएगा। इस कांफ्रेंस में 230 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं और बड़ी संख्या में प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय