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लंदन, 04 दिसंबर (हि.स.)। ब्रिटेन ने गुरुवार को रूस पर नए कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें 2018 के कुख्यात नोविचोक जहरकांड में सीधे तौर पर शामिल बताई गई रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह कदम ब्रिटेन की एक सार्वजनिक जांच रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोहरे एजेंट सर्गेई स्क्रिपाल पर नसर्व एजेंट हमले का आदेश दिया था। यही हमला बाद में ब्रिटिश नागरिक डॉन स्टर्जेस की मौत का कारण बना।
सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए रूसी राजदूत को तलब किया और मॉस्को की “ब्रिटेन के खिलाफ चल रही शत्रुतापूर्ण गतिविधियों” पर जवाब मांगा।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, “आज के निष्कर्ष क्रेमलिन द्वारा निर्दोष नागरिकों के जीवन के प्रति घोर उपेक्षा की गंभीर याद दिलाते हैं।”
जीआरयू और उसके अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध
ब्रिटेन ने जीआरयू पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ ही आठ साइबर सैन्य खुफिया अधिकारियों और तीन अन्य जीआरयू अधिकारियों को भी निशाना बनाया है, जो यूरोप और यूक्रेन में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों, जिसमें यूक्रेनी सुपरमार्केट पर हमले की साजिश भी शामिल है, में शामिल बताए गए हैं। रूस ने हमेशा की तरह सैलिस्बरी हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने ब्रिटेन की कार्रवाई को “मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित अवैध प्रतिबंध” बताया और कहा कि रूस “जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ब्रिटेन को इन कदमों की अनिवार्यता का भरोसा होना चाहिए।
ब्रिटेन, जो यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से कीव का एक प्रमुख समर्थक रहा है, पहले भी रूस के व्यापारियों, नेताओं और कंपनियों पर व्यापक प्रतिबंध लगा चुका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय