पांच माह बाद भी अपहृत नाबालिग का नहीं मिला सुराग, उच्च न्यायालय ने विवेचना पर उठाए सवाल
उच्च न्यायालय ने एसएसपी से मांगा हलफनामा
पांच माह बाद भी अपहृत नाबालिग का नहीं मिला सुराग, उच्च न्यायालय ने विवेचना पर उठाए सवाल


झांसी, 4 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में थाना सीपरी बाजार क्षेत्र से पांच माह पूर्व अपहृत नाबालिग की अब तक बरामदगी न होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ (कोर्ट नंबर–6) ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण में एसएसपी झांसी से 10 दिसंबर तक शपथपत्र (हलफनामा) दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने विवेचना में लापरवाही को गंभीर मानते हुए पुलिस को फटकार लगाई है।

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह यादव ने अदालत को जानकारी दी कि सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के लहर गिर्द निवासी पीड़िता की नाबालिग पुत्री को 10 जून 2025 को पड़ोस में रहने वाला एक नाबालिग बहला-फुसलाकर ले गया था। पीड़िता के अनुसार घटना के दिन थाना सीपरी बाजार में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अगले दिन स्वयं तलाश करते समय उसे सीसीटीवी फुटेज मिला, जिसमें आरोपी लड़की को लेकर जाता दिख रहा था। फुटेज देने के बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया व आरोपित को पकड़कर बाल सुधार गृह भेजा। बाद में आरोपित को जमानत मिल गई और वह घर वापस आ गया।

महिला ने आरोप लगाया कि आरोपित ने जेल से फोन कर धमकी दी कि लड़की उसके रिश्तेदारों के पास ग्वालियर में है और मुकदमा वापस न लेने पर उसकी हत्या कर देंगे। इस संबंध में लिखित शिकायत, फोन रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत पुलिस को दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

विवेचना पर सवाल

पीड़िता का कहना है कि विवेचक ने पॉक्सो एक्ट की धारा नहीं लगाई, लड़की की बरामदगी के प्रयास नहीं किए, बीना रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज एकत्र नहीं किए, आरोपी द्वारा जेल से किए गए फोन की रिकॉर्डिंग कब्जे में नहीं ली, आरोपी द्वारा बताए गए अन्य संदिग्ध साथियों से पूछताछ नहीं की। वहीं विवेचक का दावा है कि आरोपी को मध्यप्रदेश के बीना स्टेशन से पकड़ा गया, जहाँ से लड़की “रात में कहीं चली गई।” इस पर पीड़िता ने सवाल उठाया कि “अगर वह स्टेशन से निकली है, तो फुटेज में जरूर दिखेगी। आखिर वह आसमान में तो उड़ नहीं गई होगी।

उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणी

अदालत ने कहा कि चार महीने बीतने के बाद भी नाबालिग की बरामदगी न होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। विवेचना में ढिलाई और तथ्यों की अनदेखी “पक्षपातपूर्ण रवैया” दर्शाती है। अदालत ने एसएसपी झांसी को निर्देश दिया कि पूरे मामले का विस्तृत हलफनामा 10 दिसंबर तक प्रस्तुत करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया