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नई दिल्ली, 02 दिसंबर (हि.स.)। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 हजार करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के आरोपित जेपी इंफ्राटेक के पूर्व चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौर की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। एडिशनल सेशंस जज धीरेंद्र राणा ने मनोज गौर को 16 दिसंबर तक की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
आज मनोज गौर की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही थी, जिसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने 13 नवंबर को मनोज गौर को पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेजा था।
मनोज गौर पर आरोप है कि उसने घर खरीददारों से जुटाई गई रकम की हेराफेरी करने में अहम भूमिका निभाई। ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि ये मामला जेपी ग्रुप की दो कंपनियों जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) और जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) से जुड़े वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ मामला है। ईडी के मुताबिक 2017 में घर खरीददारों के विरोध प्रदर्शन के बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें जेपी ग्रुप पर धोखाधड़ी करने, आपराधिक साजिश रचने और कपटपूर्वक निवेश कराने के आरोप लगे थे।
ईडी के मुताबिक जेपी समूह के कथित धोखाधड़ी में जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं जिनमें निवेशकों को 2010-11 से घरों का वादा किया गाय था, लेकिन आज तक कई घर खरीददारों को मकान का कब्जा नहीं मिला। ईडी के मुताबिक जांच में पता चला कि मनोज गौर कंपनी के प्रबंध निदेशक के रुप में वित्तीय फैसलों और प्रबंधन में सीधे सीधे शामिल था और खरीददारों की रकम को ग्रूप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
ईडी ने इस मामले में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में करीब 15 स्थानों पर छापा मारा था। छापे के दौरान ईडी ने 1.7 करोड़ की नकदी, महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स और संपत्तियों के कागजात जब्त किए थे। ईडी ने कुछ दूसरे रियल इस्टेट कंपनियों के दफ्तरों की भी तलाशी ली थी जिनका जेपी ग्रूप से वित्तीय लेनदेन था। इन कंपनियों में गौरसंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुलशन होम्स प्राईवेट लिमिटेड और महागुन रियल इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा