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झांसी, 7 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश (एफ०टी०सी० सी०ए० डब्लू०) अनुभव द्विवेदी के न्यायालय ने छह वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रूपए था अर्थदण्ड भी लगाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय कुमार पाण्डेय के अनुसार ग्राम बोडा निवासी वादी मुकदमा इन्द्रपाल सिंह ने कोतवाली मऊरानीपुर में 16 मई 2014 को तहरीर देते हुए बताया था कि 14 मई 2014 को मेरे भाई प्रदीप सिंह को गांव के मनोहर, मुन्ना, घनश्याम पुत्रगण सरमन धोबी व भगवानदास पुत्र छक्की चमार घर से लिवा ले गये। मनोहर के दरवाजे पर इन सब लोगों ने मेरे भाई को घेर कर अकारण गाली गलोज कर जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट की। भाई ने विरोध किया तो घनश्याम व भगवानदास ने सिर में गुम्मा से वार कर घायल कर दिया जिससे सिर में गंभीर चोटे आने से भाई जमीन पर गिर पड़ा। घायल अवस्था में प्रदीप सिंह को सरकारी अस्पताल मऊरानीपुर इलाज के लिये ले जाया गया, चिकित्सक ने गम्भीर हालत देखते हुये मेडीकल कालेज रेफर कर दिया जहां मेरे भाई की इलाज के दौरान 15 मई 2014 को मृत्यु हो गयी।
धारा-304 भा०द०स० के तहत थाना मऊरानीपुर में मुकदमा दर्ज कर विवेचना उपरांत मनोहर, पुत्र सरमन धोबी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। दौरान मुकदमा अभियुक्त घनश्याम व मुन्ना की मौत हो गयी। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त मनोहर को भारतीय दण्ड संहिता की धारा-304 भा०दं० सं० सपठित धारा-34 भा०दं० सं० के अंतर्गत 06 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा तथा 20 हजार रूपए अर्थदण्ड , अर्थदण्ड न दिए जाने की दशा में अभियुक्त को दो माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया