मप्र के जबलपुर में इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव शुरू, देशभर से उद्यमी हुए शामिल
जबलपुर, 07 नवंबर (हि.स.)। देश में रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में शुक्रवार को तीन दिवसीय इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 9 नवंबर तक चलेगा। क
इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्ले


जबलपुर, 07 नवंबर (हि.स.)। देश में रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में शुक्रवार को तीन दिवसीय इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 9 नवंबर तक चलेगा। कॉन्क्लेव का शुभारंभ आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) के सीएमडी संजय द्विवेदी ने किया। इस दौरान रक्षा मंत्रालय के अधिकारी, कई कंपनियों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। आयोजन में 60 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। इसका मकसद रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, वेंडर डेवलपमेंट और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना है।

व्हीकल फैक्ट्री स्टेडियम में हो रहा यह आयोजन एवीएनएल और सीआईआई (कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) के सहयोग से किया जा रहा है। सीआईआई के सीजीएम प्रवीण सिंह ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र के लिए सक्षम और प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना है। इसके साथ ही, एमएसएमई और स्टार्टअप को ज्यादा अवसर देना और मेक इन इंडिया अभियान को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि इससे लोकल वेंडर्स को काम मिलेगा और वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे।

मुख्य अतिथि संजय द्विवेदी ने कहा कि भारत में अब स्वदेशी रक्षा उपकरणों का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और इसमें सरकारी उपक्रमों के साथ निजी कंपनियों का भी बड़ा योगदान है।उन्होंने बताया कि एवीएनएल एक मिनी रत्न कंपनी है जो नए रक्षा उत्पादों के निर्माण में छोटे और मध्यम उद्योगों के सहयोग से काम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश का जबलपुर अब देश का बड़ा डिफेंस हब बन चुका है। यहां चार बड़ी रक्षा उत्पादन फैक्ट्रियां हैं। केवल व्हीकल फैक्ट्री ही करीब 4 हजार करोड़ रुपए का सालाना व्यवसाय कर रही है। आने वाले नए प्रोजेक्ट्स में लोकल कंपनियों को भी जोड़ा जाएगा।”

सीजीएम प्रवीण सिंह के अनुसार, कॉन्क्लेव के पांच प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। रक्षा उपक्रमों के लिए सक्षम और प्रतिस्पर्धी सप्लायर नेटवर्क तैयार करना. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के अनुसार मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना, MSME और स्टार्टअप की भागीदारी बढ़ाना।, उद्योगों और सरकारी खरीद विभागों के बीच बेहतर संवाद बनाना और छोटे उद्योगों और टियर-II/III आपूर्तिकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा करना। इस कार्यक्रम में देश की अग्रणी कंपनियां शामिल हुईं, जिनमें डीआरडीओ, बीईएमएल, BEL, बामर लॉरी, अशोक लीलैंड, टाटा, महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इसुजु, टोयोटा और फोर्स मोटर्स प्रमुख हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर