Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

भोपाल, 08 अगस्त (हि.स.)। पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार से योजना के खर्च और उपयोग का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। पटवारी ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि मई 2024 में शुरू हुई इस सेवा पर अब तक करीब 35 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की बात सामने आई है। उनका दावा है कि प्रदेश के 30 जिलों में अब तक एक भी मरीज ने इस सेवा का लाभ नहीं लिया।
जीतू पटवारी ने शनिवार काे जारी अपने बयान में कहा कि एयर एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य दुर्घटना में घायल, गंभीर बीमार और जरूरतमंद मरीजों को कम समय में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सेवा के लिए किए जा रहे खर्च के अनुपात में इसका उपयोग कितना हुआ और जरूरतमंद मरीजों तक इसकी पहुंच कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार दो वर्षों में 159 मरीजों ने एयर एंबुलेंस सेवा का लाभ लिया है। इनमें 56 मरीज अकेले रीवा जिले के बताए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सेवा पूरे प्रदेश के लिए उपलब्ध है तो इसका लाभ सभी जिलों में समान रूप से क्यों नहीं पहुंच रहा। पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में मरीजों को एयर एंबुलेंस की सुविधा दी जाती है और जिला स्तर पर इसके लिए क्या प्रक्रिया निर्धारित है।
खर्च और वास्तविक उपयोग का ब्योरा मांगा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने सरकार से एयर एंबुलेंस सेवा से संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने पूछा कि अब तक सेवा पर कुल कितना खर्च हुआ, कितने घंटे के लिए एयर एंबुलेंस उपलब्ध रही, वास्तव में कितने घंटे इसका संचालन हुआ और कितनी बार मरीजों को इसका लाभ मिला। उन्होंने यह जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की कि सेवा के संचालन के लिए किस एजेंसी या कंपनी के साथ समझौता किया गया है, भुगतान की शर्तें क्या हैं और प्रति घंटे कितना भुगतान किया जा रहा है।
योजना की जानकारी और प्रक्रिया पर भी सवाल
पटवारी ने कहा कि गंभीर मरीज के लिए समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एयर एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा की जानकारी अस्पतालों, डॉक्टरों और जिला प्रशासन तक स्पष्ट रूप से पहुंचना जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सभी जिलों में इस सुविधा की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है, अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के बीच इसके उपयोग को लेकर समन्वय की व्यवस्था है और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कितनी सरल है।
सरकार से स्वतंत्र मूल्यांकन की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने योजना की उपयोगिता का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह देखना चाहिए कि योजना का लाभ किन क्षेत्रों और मरीजों तक पहुंच रहा है और किन क्षेत्रों में इसका उपयोग कम है। पटवारी ने कहा कि सरकार को विज्ञापन और दावों के बजाय स्वास्थ्य योजनाओं के वास्तविक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, एयर एंबुलेंस जैसी सेवा का उद्देश्य गंभीर मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना
जीतू पटवारी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, दवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी योजनाओं पर कितना पैसा खर्च हो रहा है और उसके बदले लोगों को कितनी सुविधा मिल रही है।
जीतू पटवारी ने सरकार से पूछे सवाल
एयर एंबुलेंस सेवा पर अब तक कुल कितना खर्च हुआ?
सेवा के लिए कितने घंटे का भुगतान किया गया और वास्तव में कितने घंटे इसका उपयोग हुआ?
दो वर्षों में 159 मरीजों तक ही सेवा सीमित रहने की वजह क्या है?
रीवा में 56 मरीजों के मुकाबले अन्य जिलों में उपयोग कम क्यों रहा?
30 जिलों में अब तक किसी मरीज को लाभ नहीं मिलने की वजह क्या है?
सभी जिलों में इस सेवा की जानकारी और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है?
एयर एंबुलेंस संचालन के लिए किस एजेंसी को भुगतान किया जा रहा है और भुगतान की शर्तें क्या हैं?
क्या सरकार ने योजना की उपयोगिता और प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया है?
पटवारी ने कहा कि सरकार को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देते हुए योजना के खर्च, संचालन और उपयोग से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एयर एंबुलेंस सेवा का वास्तविक उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए और इसके लिए व्यवस्था की कमियों की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे