बीस दिन की पैरोल मिलने के बाद भी आसाराम जेल से रिहा नहीं, हाई कोर्ट का राजस्थान सरकार को नोटिस
जोधपुर, 08 अगस्त (हि.स.)। अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन शोषण के आरोप में जोधपुर की सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को लेकर एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल मिलने के बावजूद उन
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जोधपुर, 08 अगस्त (हि.स.)। अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन शोषण के आरोप में जोधपुर की सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को लेकर एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल मिलने के बावजूद उन्हें जेल प्रशासन ने रिहा नहीं किया है। इस पर आसाराम के वकीलों ने फिर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसके बाद अदालत ने राजस्थान सरकार से सवाल किया है कि आदेश के बाद भी रिहाई क्यों नहीं हुई?

राजस्थान उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच में इस मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूरी स्थिति पर जवाब-तलब किया है। अब सरकार और जेल प्रशासन को कोर्ट में यह साफ करना होगा कि पैरोल मिलने के बाद भी आसाराम को बाहर क्यों नहीं आने दिया गया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है। फिलहाल, आसाराम जोधपुर के एक आयुर्वेद अस्पताल में पुलिस हिरासत के बीच अपना इलाज करवा रहा है।

दूसरी तरफ, उच्चतम न्यायालय ने खराब सेहत के आधार पर आसाराम को अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया और उसे पेंडिंग रखा है। कोर्ट का कहना है कि अगर भविष्य में स्वास्थ्य स्थिति अधिक बिगड़ती है तो वे दोबारा अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आसाराम ने उच्च न्यायालय से 20 दिनों की पैरोल मांगते समय यह बात छुपाई थी कि उच्चतम न्यायालय में भी उनकी अंतरिम जमानत की याचिका चल रही है। उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर नाराजगी जताई और जानकारी छुपाने की कोशिश की निंदा की।

फिलहाल आसाराम की रिहाई का मामला कानूनी पचड़ों में उलझ गया है। एक तरफ जहां उच्च न्यायालय के पैरोल आदेश पर अमल न होने से सवाल उठ रहे हैं। दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय में जानकारी छुपाने के आरोप ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। अब 17 अगस्त को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई में ही साफ हो पाएगा कि आसाराम को पैरोल पर बाहर आने का मौका मिलेगा या उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश