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क्लोरीन टेबलेट का वितरण, जमा पानी की सफाई और सुरक्षित पेयजल के लिए जागरूकता अभियान
धमतरी, 10 अगस्त (हि.स.)। बारिश के मौसम में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के साथ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया, डेंगू सहित अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए निगरानी और जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों के शुद्धिकरण पर विशेष ध्यान देते हुए क्लोरीन टेबलेट का वितरण किया जा रहा है, वहीं हैंडपंप, कुएं और अन्य जलस्रोतों के नियमित क्लोरीनीकरण की कार्रवाई भी की जा रही है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिलेवासियों से बारिश के मौसम में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मलेरिया, डेंगू और जलजनित बीमारियों की रोकथाम में प्रशासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी जरूरी है। नागरिक घर और आसपास पानी जमा न होने दें, पेयजल को सुरक्षित रखें तथा बुखार या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। बारिश के दौरान उल्टी-दस्त, बुखार, पीलिया, मलेरिया और आंत्रशोध जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने, सड़ी-गली सब्जियों और फलों से बचने तथा दस्त होने पर शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी दूर करने के लिए लो-ऑस्मोलर ओआरएस घोल का सेवन करने की सलाह दी गई है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से ‘हर रविवार, मच्छर पर वार’ की भावना के साथ घर और आसपास जमा पानी की नियमित सफाई करने की अपील की है। किसी भी तरह का बुखार या संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने और शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जांच एवं उपचार कराने की सलाह दी गई है।
सीएमएचओ डा यूएल कौशिक ने साेमवार काे बताया कि मलेरिया संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जिसके प्रमुख लक्षण हाथ-पैर में दर्द, सिरदर्द, ठंड के साथ बुखार आना आदि हैं। इससे बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होने वाला वायरल संक्रमण है। तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू से बचाव के लिए कूलर, बाल्टी, गमले, पुराने टायर और अन्य पात्रों में पानी जमा न होने दें तथा आसपास स्वच्छता बनाए रखें। खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाने और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने की भी सलाह दी गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा