नशामुक्त युवा ही बनाएंगे सशक्त और विकसित भारत : प्रो. सत्यकाम
लेहरा गांव में नुक्कड़ नाटक से नशे के दुष्परिणामों का संदेश, परिवार को जागरूकता की पहली इकाई बताया प्रयागराज, 10 अगस्त (हि.स.)। स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति ही सशक्त एवं विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका
मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का छाया चित्र


मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का छाया चित्र


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लेहरा गांव में नुक्कड़ नाटक से नशे के दुष्परिणामों का संदेश, परिवार को जागरूकता की पहली इकाई बताया

प्रयागराज, 10 अगस्त (हि.स.)। स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति ही सशक्त एवं विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नशा केवल व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए नशा उन्मूलन को केवल किसी संस्थागत कार्यक्रम तक सीमित न रखकर सामाजिक आंदोलन का रूप देना होगा। यह बात विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को गोद लिए गए सोरांव क्षेत्र के लेहरा गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में नशा उन्मूलन एवं जन-जागरूकता अभियान में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कही।

उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध जागरूकता की पहली और सबसे प्रभावी इकाई परिवार है। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को बच्चों एवं युवाओं के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। युवाओं को यह समझना होगा कि उनका स्वास्थ्य, ऊर्जा और प्रतिभा केवल उनकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है। उन्होंने ग्रामीणों और विद्यार्थियों से सभी प्रकार के नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार को भी नशामुक्त रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

इस दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया।

नुक्कड़ नाटक से समझाया नशे का दुष्परिणाम

नुक्कड़ नाटक में ज्योति, दिग्विजय, शिवा और उनकी टीम ने अभिनय के माध्यम से बताया कि नशे की शुरुआत कई बार शौक, जिज्ञासा या गलत संगति से होती है। धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करने लगता है। कलाकारों ने सरल संवाद और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाली पारिवारिक परेशानियों, स्वास्थ्य संबंधी नुकसान तथा सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की अपील की गई। साथ ही समय रहते उचित मार्गदर्शन और परिवार एवं समाज के सहयोग को नशे से बचाव के लिए जरूरी बताया गया।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. ज्ञान प्रकाश यादव ने कहा कि जन-जागरूकता कार्यक्रम तभी सार्थक होते हैं, जब उनका संदेश विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर गांवों और समाज तक पहुंचे। नुक्कड़ नाटक गंभीर सामाजिक विषयों को सहज और प्रभावी ढंग से आम लोगों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, प्रो. विनोद कुमार गुप्त, प्रो. मीरा पाल, डॉ. साधना श्रीवास्तव, डॉ. अमरेन्द्र कुमार यादव, डॉ. धर्मराज यादव और डॉ. आशा कृष्ण सहित विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य, विद्यालय के शिक्षक-विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए विश्वविद्यालय परिवार, कंपोजिट विद्यालय के शिक्षकों-विद्यार्थियों और लेहरा गांव के ग्रामीणों के प्रति आभार जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र ने व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल