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मोती, धान-चावल, बीज और रक्तमौली धागों से तैयार राखियों में दिखी स्थानीय हुनर और पर्यावरण संरक्षण की झलक
जांजगीर-चांपा, 10 अगस्त (हि. स.)। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर कलेक्टोरेट परिसर में साेमवार काे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों का विशेष स्टॉल लगाया गया। जिले के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपनी रचनात्मकता और हुनर का परिचय देते हुए मोती, नग, धान-चावल, रक्तमौली धागे तथा विभिन्न प्रकार के बीजों से आकर्षक, पर्यावरण अनुकूल एवं नवाचार से भरपूर राखियां तैयार की हैं।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कलेक्टोरेट परिसर में लगाए गए राखी स्टॉल का अवलोकन किया और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत करते हुए उनसे स्वयं हस्तनिर्मित राखियां खरीदीं। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार राखियों की सराहना करते हुए उनके हुनर और मेहनत को प्रोत्साहित किया। कलेक्टर ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देने से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को भी बाजार मिल रहा है।
स्टॉल में प्रदर्शित राखियों में पारंपरिक कला के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश भी देखने को मिला। विभिन्न प्रकार के बीजों, धान-चावल और प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने बताया कि हस्तनिर्मित राखियों के निर्माण और बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। पर्व विशेष के लिए तैयार किए गए इन उत्पादों की बिक्री से उन्हें अपने हुनर को पहचान दिलाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। महिलाओं ने कहा कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/लालिमा शुक्ला पुरोहित
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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT